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शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

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शर्मिंदा-लघुकथा

Posted On: 29 May, 2017 Celebrity Writer में

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शर्मिंदा-लघुकथा…

”अरे चेयरमैन साब ! आपको क्या जरूरत थी आने की ……चपरासी को भेज देते …मैं आपकी पसंद का सामान घर ही पहुंचवा देता .” जनरल स्टोर पर पधारे विशिष्ठ अतिथि को देख स्टोर मालिक सोनू गदगद हो उठा . चेयरमैन साब मुस्कुराते हुए बोले ‘ अरे नहीं नहीं ….आज सोचा कस्बे में घूम आऊं .ये सामने रखा बाथ सोप दिखाना .” नहाने के साबुन की ओर इशारा कर उन्होंने कहा .सोनू ने तुरंत उन्हें वैसे ही चार साबुन दिखा दिए और बोला -” बेस्ट सोप है …ले लीजिये .” उन्हें पसंद आये और उन्होंने पूछा -” कितने के हुए ?” सोनू सकुचाता हुआ बोलै -” क्यों शर्मिंदा करते हैं ? आपसे पैसे लूंगा क्या ! ” चेयरमैन साब के बहुत बार कहने पर भी उसने साबुनों के रूपये नहीं लिए और ठंडा – गरम मंगाने की जिद करने लगा पर चेयरमैन साब के पास अधिक समय नहीं था और वे विदा हो गये. उनके जाने के बाद एक गरीब आदमी सोनू के स्टोर पर आया और वैसे ही नहाने के साबुन की ओर इशारा करता हुआ बोला – ‘ये कितने का दिया भाई?’ सोनू उपेक्षित से भाव में बोला – ‘सत्तर रूपये का है एक.’ वो गरीब आदमी जेब से रूपये निकालकर सकुचाते हुये बोला – ‘ये पैंसठ रूपये हैं… पांच बाद में लगा लेना.’ उसकी विनती सुनकर सोनू उसे समझाते हुये बोला – ‘ भाई …कोई सस्ता सा साबुन ले ले ..उधार मांगकर मुझे शर्मिंदा मत कर .” उसकी इस बात पर गरीब आदमी उसके स्टोर से उतर कर चल दिया और वास्तव में मानवता शर्मिंदा हो उठी .

शिखा कौशिक ‘नूतन’



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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
June 5, 2017

प्रिय शिखा जी समाज की असलियत का चित्रण करता लेख यही हाल है

    DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
    June 6, 2017

    आदरणीय शोभा जी टिप्पणी हेतु हार्दिक आभार स्वीकार करें.

rajk1234 के द्वारा
June 2, 2017

समाज के दोगले चरित्र को उजागर कराती बेहतरीन कहानी /

    DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
    June 3, 2017

    हार्दिक धन्यवाद राज जी

ashasahay के द्वारा
June 1, 2017

समाज के विशेष मनोविज्ञान को प्रगट करती एक अच्छी लघुकथा।

    DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
    June 1, 2017

    हार्दिक धन्यवाद आशा जी


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