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शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

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"देर न हो जाए घाटी... गुमराह न हो "

Posted On: 22 May, 2017 Celebrity Writer में

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देर न हो जाये घाटी आज जाग जा ,
मेरी वफ़ा का दे सिला अलगाव भूल जा !
हिंदुस्तान जैसा आशिक न मिलेगा ,
गुमराह न हो सैय्याद की चाल जान जा !
…………………..

जो हाथ थाम मेरा साथ चलेगी ,
मंजिल तरक्की की तुझे रोज़ मिलेगी ,
खामोश न रह मेरे संग चीख कर दिखा !
मेरी वफ़ा का दे सिला अलगाव भूल जा !
………………………

नोंचने की है पडोसी की तो आदत ,
अस्मत बचाई तेरी देकर के शहादत ,
नादान न बन आ मेरी हिफाज़त में तू आ जा !
मेरी वफ़ा का दे सिला अलगाव भूल जा !
……………………………

करना है फैसला तुझे रख नेक इरादा  ,
मेरी अज़ीज़ तू रही है जान से जयादा ,
है इश्क़ दूध मेरा केसर सी तू घुल जा !
मेरी वफ़ा का दे सिला अलगाव भूल जा !

शिखा कौशिक ‘नूतन ”



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rajk1234 के द्वारा
June 3, 2017

बहुत सुन्दर कविता शिखाजी ! काश की ये कश्मीर के पत्थरबाज इस तरह से सोच पाते

    DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
    June 3, 2017

    हार्दिक आभार राज जी कविता के मर्म को समझने हेतु


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