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शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

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“मेरा बिस्तर बंधा हुआ है “

Posted On 12 Mar, 2017 Celebrity Writer में

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भावुकता
कुछ अंश विवशता
वापस लौटा लाई है,
पुनरागमन देख ये मेरा
चिंता तुम्हे सताई है ,
लेकिन तुम आश्वस्त रहो
कोई गोरखधंधा नहीं हुआ है ,
मेरा बिस्तर बँधा हुआ है !
………………………………..
कुछ क्षण रूककर
देख-परखकर
छूटे काम करूंगी पूरे ,
मेरे विचलित उर के कारण
जो रह गए थे सभी अधूरे ,
लेकिन तुम आश्वस्त रहो
कोई गोरखधंधा नहीं हुआ है ,
मेरा बिस्तर बँधा हुआ है !
………………………………..
स्थिर नहीं है पुनरागमन
निश्चित है मेरा जाना ,
उर में घाव लगे हैं गहरे
कठिन बहुत उनका भर पाना ,
लेकिन तुम आश्वस्त रहो
कोई गोरखधंधा नहीं हुआ है ,
मेरा बिस्तर बँधा हुआ है !
………………………………..
रूकती नहीं गति इस जग की
कोई आये ; कोई जाये ,
नित नूतन सृष्टि है सजती
फिर क्यों पुष्प कोई इठलाये
लेकिन तुम आश्वस्त रहो
कोई गोरखधंधा नहीं हुआ है ,
मेरा बिस्तर बँधा हुआ है !

शिखा कौशिक ‘नूतन ‘

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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
March 21, 2017

रूकती नहीं गति इस जग की कोई आये ; कोई जाये , नित नूतन सृष्टि है सजती फिर क्यों पुष्प कोई इठलाये बहुत सुन्दर पंक्तियाँ ! आदरणीया शिखा कौशिक ‘नूतन‘ जी, सत्य भाव से परिपूर्ण बहुत अच्छी कविता के लिए बहुत बहुत अभिनन्दन और हार्दिक बधाई ! हर चीज से ऊब जाने का नाम ही मोक्ष है ! बिस्तर बंधने से पहले ही ये भाव मन में उठने लगे तो अच्छा ही है ! सादर आभार !

Shobha के द्वारा
March 17, 2017

कुछ समय बाद शिखा जी आप अपनी सुंदर कविता के साथ ब्लॉग पर आयीं रूकती नहीं गति इस जग की कोई आये ; कोई जाये , नित नूतन सृष्टि है सजती फिर क्यों पुष्प कोई इठलाये सही है

    DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
    March 18, 2017

    हार्दिक धन्यवाद शोभा जी


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