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शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

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मुझे खामोश रहने दो

Posted On: 20 Nov, 2016 में

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मेरे दिल में बहुत शोले
मुझे खामोश रहने दो,
लबों पर आ गये तो
आग दुनिया में लगा देंगे !

उबलते हैं उफनते हैं
बगावत के समन्दर जो,
अगर दिल चीर कर रख दूं
ये दुनिया को बहा देंगे !

तेरी जिद है बनाना
मुझको अपने पैर की जूती,
हमारे हौसले सरताज
दुनिया का बना देंगे !

नहीं मिट सकती है हस्ती
कभी औरत की दुनिया से,
हम अपने दुश्मनों का नाम
दुनिया से मिटा देंगे !

तुम्हारे जुल्म है नूतन
हद – ए- बर्दाश्त से बाहर,
पलट कर वार मेरे आज
दुनिया को हिला देंगे !

शिखा कौशिक नूतन

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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yamunapathak के द्वारा
December 8, 2016

वाह

December 7, 2016

बहुत सुन्दर

sanjeevtrivedi के द्वारा
December 3, 2016

बहुत ही सुन्दर कविता


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