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शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

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''हाँ ! कलम में है वो ताकत !''

Posted On: 27 Oct, 2015 Others,Junction Forum,Celebrity Writer में

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है नहीं शमशीर कोई सिर कलम का काट दे !
हाँ ! कलम में है वो ताकत झूठ का सिर काट दे !
……………………………………………………….
ज़ालिमों का पर्दाफाश कर रही है जो कलम ,
हौसलों के हाथ उसके कौन कैसे काट दे !
………………………………………………….
सच की पहरेदार बन परवाज़ ऊँची भर रही ,
है अगर हिम्मत तो कातिल इसके पंख काट दे !
……………………………………………
झुक नहीं सकती कभी ज़ुल्मों-सितम के सामने ,
आग की लपटों को नामुमकिन है कोई काट दे !
……………………………………………………..
बेजुबान, अंधी , बहरी मत रहो ‘नूतन’ कलम ,
दुश्मनों के जिस्म आज टुकड़े-टुकड़े काट दे !

शिखा कौशिक ‘नूतन’



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5 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ashasahay के द्वारा
November 1, 2015

बहुत दिनो के बाद एक सशक्त अभिव्यक्ति दिखी । सुन्दर।

Rajesh Kumar Srivastav के द्वारा
November 1, 2015

कलम की वार कभी ना जाती बेकार । 

Shobha के द्वारा
November 1, 2015

प्रिय शिखा जी कलम की ताकत सदैव रही है सदैव रहेगी उत्तम विचार से परिपूर्ण रचना

yamunapathak के द्वारा
October 31, 2015

बहुत अच्छी अभिव्यक्ति है शिखा जी साभार

October 27, 2015

ekdam sahi abhivyakti .josh bhar diya shikha ji aapne .thanks


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