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शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

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सोशल साइट्स बन गयी ज़िंदगी का अंग !!

Posted On: 30 Sep, 2015 Others,कविता,Hindi Sahitya में

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यारों के घर आना -जाना हो गया है बंद ,
”चैट” करना ”लाइक ” करना अब हमें पसंद !
कुछ भलाई कुछ बुराई कुछ ख़ुशी कुछ रंज ,
सोशल साइट्स बन गयी ज़िंदगी का अंग !!
…………………………….

अब कहाँ नुक्कड़ की महफ़िल अब कहाँ चौपाल ,
अब कहाँ जुम्मन के किस्से औ चंदू के धमाल ,
अब तो फेसबुक बिना ज़िंदगी बदरंग !
सोशल साइट्स बन गयी ज़िंदगी का अंग !!
……………………………

बेगमें भी अब पड़ोसन से न मिलती ,
कामवाली से नहीं कोई खबर सुनती ,
अब छतों पर गुफ्तगूं का सिलसिला है बंद !
सोशल साइट्स बन गयी ज़िंदगी का अंग !!
……………………………

जवान है औलाद पर चिंतित न डैड -मॉम ,
एक क्लिक तो कर के देखें ‘शादी डॉट कॉम ”,
पिक्चर विवाह की हो रही शेयर सभी के संग !
सोशल साइट्स बन गयी ज़िंदगी का अंग !!
……………………………..

कोई नहीं सुना रहा मुन्नू को कहानी ,
ब्लॉग -लेखन में जुटी दादी और नानी ,
दादा -नाना ट्वीट करते बेटा -बहू हैं दंग !
सोशल साइट्स बन गयी ज़िंदगी का अंग !!
………………………………

बेगमें करती नहीं शौहर का इंतज़ार ,
दे रही हैं ब्लॉग्स पर भावों को आकार ,
दर्द बयां करने का सीख लिया ढंग !
सोशल साइट्स बन गयी ज़िंदगी का अंग !!
………………………..

जन्म -मृत्यु ,हर्ष -शोक सब है ऑनलाइन ,
मेल -मुलाकात का इंसान पर न टाइम ,
साइटों पर चल रही मोहब्बतें व् जंग !
सोशल साइट्स बन गयी ज़िंदगी का अंग !!
………………………….

है नहीं कुछ हर्ज़ ग़र हद में करें प्रयोग ,
हद से पार होते ही बन जाता है ये रोग रोग ,
मजबूत करें साइटों से आपसी सम्बन्ध !
सोशल साइट्स बन गयी ज़िंदगी का अंग !!

शिखा कौशिक ‘नूतन ‘



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yamunapathak के द्वारा
October 4, 2015

शिखा जी यह बहुत ही सही और सुन्दर ब्लॉग है साभार

Shobha के द्वारा
September 30, 2015

प्रिय शिखा जी बहुत समय बाद आपको रीडर ब्लॉग में देखा बहुत सुंदर विचार कोई नहीं सुना रहा मुन्नू को कहानी , ब्लॉग -लेखन में जुटी दादी और नानी , दादा -नाना ट्वीट करते बेटा -बहू हैं दंग ! सोशल साइट्स बन गयी ज़िंदगी का अंग !!बीएस यही हो रहा है ………………………………


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