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शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

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खुदा नहीं मगर ''माँ' खुदा से कम नहीं होती !

Posted On: 9 May, 2015 Celebrity Writer में

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”हमारी हर खता को मुस्कुराकर माफ़ कर देती ;

खुदा नहीं मगर ”माँ’ खुदा से कम नहीं होती !

………………………………………………………

”हमारी आँख में आंसू कभी आने नहीं देती ;

कि माँ की गोद से बढकर कोई जन्नत नहीं होती !

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”मेरी आँखों में वो नींद सोने पे सुहागा है ;

नरम हथेली से जब माँ मेरी थपकी है देती !

…………………………………………..

”माँ से बढकर हमदर्द दुनिया में नहीं होता ;

हमारे दर्द पर हमसे भी ज्यादा माँ ही तो रोती !

…………………………………………….

”खुदा के दिल में रहम का दरिया है बहता ;


उसी की बूँद बनकर ”माँ’ दुनिया में रहती !

…………………………………………

”उम्रदराज माँ की अहमियत कम नहीं होती ;


ये उनसे पूछकर देखो कि जिनकी माँ नहीं होती .”



शिखा कौशिक



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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
May 12, 2015

प्रिय शिखा माँ से बड़ी चीज कुछ नहीं है उम्रदराज माँ की अहमियत कम नहीं होती ;बिलकुल ठीक डॉ शोभा


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