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शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

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''हाँ हम कायर हैं !''[भारतीय किसान]

Posted On: 30 Apr, 2015 Politics,Celebrity Writer में

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हाँ हम कायर हैं !
हम खुद ही चढ़े हैं फांसी
और खा रहे हैं ज़हर !
जबकि इसके हकदार हैं
सत्ता में बैठे बहादुर !!
जिनको हमने ही चुनकर
पहुँचाया ,
फूलों का हार पहनाया ,
जयकारे लगाये उनके नाम के ,
और उन्होंने हमारे साथ की गद्दारी ,
भगवान के प्रकोप को
हम झेल जाते पर
सत्ता के शैतानों ने
छोड़ दिया हमारा हाथ और छोड़ दिया
हमें हमारी तबाह फसलों के साथ ,
न आंसूं पोछनें कोई आया
और न मुआवज़ा ही मिल पाया ,
हमारी ख़ुदकुशी का माहौल
इन सत्तासीनों ने ही तो बनाया ,
फिर भी करते हैं स्वीकार
हां हम कायर हैं !
वरना ऐसी क्रांति का बिगुल बजाते
कि सत्तासीन गाढ़ी नींद
से जाग जाते ,
हर खेत जिसमे हुई है फसल तबाह
उस तक इन्हें खींच कर ले जाते ,
हक़ से मांगते मुआवज़ा ,
और इन्हें जता देते
कि हम हैं मालिक देश के !
तुम केवल चौकीदार हो ,
पर हम ये नहीं कर पाये
इस लिए तुम ये कहने के हकदार हो
हम किसान ,
अन्न-दाता ,
खून-पसीना बहाकर
फसल उगाने वाले ,
सबका पेट भरने वाले ,
कायर हैं ,
हां हम कायर हैं !

शिखा कौशिक ‘नूतन’



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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Rajesh Kumar Srivastav के द्वारा
May 2, 2015

पढ़े -लिखे लोग कृषि को पेशा बनाये तो कुछ सुधार हो सकता है / अच्छी रचना /

Shobha के द्वारा
May 1, 2015

श्री शिखा जी बहुत भाव पूर्ण पंक्तिया हर पंक्ति अर्थ पूर्ण डॉ शोभा

maharathi के द्वारा
May 1, 2015

अति सुन्दर, बधाई । डा. अवधेश किशोर शर्मा ‘महारथी’ वृन्दावन, मथुरा (उ.प्र.) http://maharathi.jagranjunction.com/

jlsingh के द्वारा
May 1, 2015

मार्मिक और अर्थपूर्ण!


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