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शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

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'मार झपट्टा मौत अभी खुली चुनौती आज है !'

Posted On: 27 Apr, 2015 Others,Celebrity Writer में

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बेमौसम हुई बरसात ने किसानों की फसलों के साथ -साथ उनके अरमानों को तबाह कर डाला ;जिसके कारण रोज़ हमारे अन्न-दाता मौत को गले लगा रहें हैं और अचानक आये भूकम्प ने नेपाल सहित भारत के कई राज्यों में हज़ारों मासूमों की ज़िंदगी लील ली . तो क्या हम मौत के ऐसे तांडव के सामने घुटने टेक दें ? नहीं हमे मौत को ही खुली चुनौती देनी होगी कि -आ हम पर झपट्टा मार ..हम भी देखते हैं कब जाकर तेरी प्यास शांत होगी ज़ालिम !

मार झपट्टा मौत अभी खुली चुनौती आज है !
कई हादसे झेल चुका दिल मेरा फौलाद है !
……………………………………………………
एक-एक कर के कितने अपने हमसे तूने छीन लिए ,
जो जी चाहे कर ले ज़ालिम तू पूरी जल्लाद है !
………………………………………………………
बेबस होकर हाथ जोड़कर नहीं मिन्नतें करते हम ,
अपनी मनमर्ज़ी करने को तू बिलकुल आज़ाद है !
……………………………………………………
हरी-भरी बगिया को तूने झुलसा डाला बेमौसम ,
और उजाड़ेगी क्या गुलशन कौन यहाँ आबाद है !
…………………………………………………….
खौफ नहीं तेरे आने का तुझसे नज़र मिला लेंगें ,
‘नूतन’ को झुककर न करनी अब कोई फरियाद है !

शिखा कौशिक ‘नूतन’



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
April 30, 2015

खौफ नहीं तेरे आने का तुझसे नज़र मिला लेंगें , ‘नूतन’ को झुककर न करनी अब कोई फरियाद है ! आदरणीया बहुत सुन्दर और प्रेरक कविता ! हम आज भी प्रकृति के आगे कितने विवश हैं !

Shobha के द्वारा
April 29, 2015

प्रिय शिखा जी सबसे सुंदर पंक्तिया —-बेबस होकर हाथ जोड़कर नहीं मिन्नतें करते हम , अपनी मनमर्ज़ी करने को तू बिलकुल आज़ाद है | जब बस से बाहर हैं तो ऊपर वाले पर छोड़ देना उचित है डॉ शोभा


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