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शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

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हम इंसान हो गए -लघु कथा

Posted On: 7 Apr, 2015 Others में

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हम इंसान हो गए -लघु कथा

खुशबू कालेज जा रही थी . बीच रास्ते में उसकी सेंडिल की हील निकल गयी . पीछे से आती एक बाइक रुकी .खुशबू ने मुड़कर देखा तो ये साहिल था .साहिल बाइक से उतरा और उसकी सेंडिल हाथ में लेता हुआ बोला -चलो इसे ठीक करा देता हूँ पास में ही एक मोची बैठता है .खुशबू थोड़ा लज्जित होते हुए बोली -अरे आप क्यों मेरे सेंडिल हाथ में लेते हैं किसी ने देख लिया तो क्या कहेगा कि नीच जाति की लड़की की सेंडिल एक ब्राह्मण लड़का हाथ से उठा रहा है .साहिल ठहाका लगता हुआ बोला -” चुप से चलती हो या तुम्हें भी उठाना पड़ेगा .” इस घटना के दो साल बाद साहिल और खुशबू ने प्रेम-विवाह किया तब खुशबू साहिल को वरमाला पहनाते हुए बोली थी -” आज से तुम मेरी नीच जाति के हो गए या मैं ब्राह्मण हो गयी ?” साहिल ने उसकी वरमाला पहनते हुए कहा था -” आज से हम इंसान हो गए .
डॉ.शिखा कौशिक ‘नूतन’

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Madan Mohan saxena के द्वारा
April 10, 2015

काश ऐसा हो पाता तो कितना अच्छा होता , अच्छी कहानी


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