! अब लिखो बिना डरे !

शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

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''माँ'' पूरी कायनात है !

Posted On: 2 Apr, 2015 Others में

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जो कलम लिख देती माँ ,
हो जाती वो तो पाक है ,
क्या लिखूं माँ के लिए ?
”माँ’ पूरी कायनात है !
……………………………..
मैं हूँ क़तरा ; माँ समंदर ,
मैं कली वो है चमन ,
माँ के चरणों में है जन्नत ,
माँ ज़मी माँ ही गगन !
कामयाबी हर मेरी
”माँ” का आशीर्वाद है !
क्या लिखूं माँ के लिए ?
”माँ’ पूरी कायनात है !
…………………………..
हम से पहले माँ ये जाने ,
क्या हमें कब चाहिए ?
माँ का दिल ममता भरा
और कुछ न पाइए ,
एक आह हमने भरी
माँ जागती दिन-रात है !
क्या लिखूं माँ के लिए ?
”माँ’ पूरी कायनात है !
…………………………………..
हम हँसे तो माँ हंसी ,
रोने पर पुचकारती ,
डांट देती भूल पर ;
पल में फिर दुलारती !
माँ दुआ बनकर सदा
रहती हमारे साथ है !
क्या लिखूं माँ के लिए ?
”माँ’ पूरी कायनात है !

शिखा कौशिक ‘नूतन’



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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rajanidurgesh के द्वारा
April 6, 2015

शिखाजी उत्तम अभिव्यक्ति . माँ शब्द का उच्चारण विभिन्न भाषाओँ में मिलता जुलता इसीलिए होता है. माता,मात,मातृ ,मदर इत्यादि सब ‘म ‘ से शुरू होता है और ‘म’ में ईश्वर हैं अतः माँ ईश्वर से भी महान होती है. बहुत अच्छा .


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