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शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

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‘दिल तो दिल है ‘

Posted On 26 Mar, 2015 Celebrity Writer, Hindi Sahitya में

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भोला सा नाज़ुक सा दिल ये कितने सदमे झेलेगा ,
ग़म से भरकर फट जायेगा कितने सदमे झेलेगा !
…………………………………………………………………
फूल से दिल पर दर्द के पत्थर कैसे वो बच पायेगा ?
टुकड़े टुकड़े हो जायेगा जितने सदमे झेलेगा !
……………………………………………………
जब जब दिल ये आह भरेगा पलकें तब तब भीगेंगी ,
कब तक दिल बर्दाश्त करेगा कब तक खुद से खेलेगा !
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किस्मत ने पैने खंजर से दिल पर सीधा वार किया ,
ज़ख्म है गहरा रूह तड़पती मुंह कैसे इससे फिरेगा !
………………………………………………………..
दिल तो दिल है ‘नूतन’ तुमको इतना भी मालूम नहीं ,
अपनों की खातिर हंसकर ये सारे सदमे झेलेगा !

शिखा कौशिक ‘नूतन’



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

RAKESH KUMAR के द्वारा
March 27, 2015

हंसकर ये सारे सदमे झेलेगा बहुत अच्छी कोशिश है

Shobha के द्वारा
March 27, 2015

प्रिय शिखा जी बहुत खुबसुरत नाजुक पंक्तियाँ परन्तु गजल की बात और है दिल में बहुत ताकत होती है वः हमारे जीवन को चलाता है डॉ शोभा


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