! अब लिखो बिना डरे !

शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

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प्रिय की दृष्टि में प्रेयसी !

Posted On: 21 Mar, 2015 Celebrity Writer,Hindi Sahitya में

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पीत वसन में लगती हो तुम
महारानी मधुमास की !
ओढ़ दुपट्टा रंग गुलाबी
लगती कली गुलाब की !
वसन आसमानी कर धारण
खिल जाता है गौर वदन !
लाल रंग के वस्त्रों में तुम
दहकी लता पलाश की !
हरा रंग तो तुम पर जैसे
नयी बहारें लाता है !
हरियाली पीली पड़ जाती
रूप तुम्हारा देखकर !
श्वेत वसन में तुम्हें देखकर
मुझको ऐसा लगता है ,
आई चांदनी आज धरा पर
छवि तुम्हारा धर कर है !

शिखा कौशिक ‘नूतन’ :



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