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शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

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'' जो शहर के इश्क में दीवाने हो गए ''

Posted On: 20 Mar, 2015 Others में

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” जो शहर के इश्क में दीवाने हो गए ”

कस्बाई सुकून उनकी किस्मत में है कहाँ !
जो शहर के इश्क में दीवाने हो गए .
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कैसे बुज़ुर्ग दें उन औलादों को दुआ !
जो छोड़कर तन्हां बेगाने हो गए .
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दोस्ती में पड़ गयी गहरी बहुत दरार ,
हम तो रहे वही ; वो जाने-माने हो गए .
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देखते ही होती थी सब में दुआ सलाम ,
लियाकत गए सब भूल ;ये फसाने हो गए .
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लिहाज के पर्दे फटे ; सब हो रहा नंगा ,
तहजीब ,शर्म , तमीज , अंधे -बहरे हो गए .
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मासूमियत में है मिलावट ; बच्चे हो रहे स्मार्ट ,
कहते हैं मत सिखाओं , तुम पुराने हो गए .

शिखा कौशिक ‘नूतन ‘

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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

vaidya surenderpal के द्वारा
March 24, 2015

वाह, बहुत खूबसूरत गजल, बधाई डॉ. शिखा जी।

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
March 23, 2015

कस्बाई सुकून उनकी किस्मत में है कहाँ ! जो शहर के इश्क में दीवाने हो गए ……………वाह, बहुत सुंदर लिखा है आपने । यही है आज का सच । मौजूदा दौर को रेखांकित करती यह कविता काबिले तारीफ है ।

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
March 22, 2015

अच्छी बहर की ग़ज़ल ! बधाई डॉ. शिखा जी !!


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