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शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

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लड़की के जन्म पर ..

Posted On: 24 Feb, 2015 social issues,Celebrity Writer में

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लड़की के जन्म पर ..

लड़की के जन्म पर
उदास क्यों हो जाते हैं
परिवारीजन ?
क्यों उड़ जाती है
रौनक चेहरों की
और क्यों हो जाती है
नए मेहमान के आने की ख़ुशी कम ?
शायद सबसे पहले मन
में आता है ये
हमसे जुदा होकर
चली जाएगी पराए घर ,
फिर एकाएक घेर लेती
है दहेज़ की फ़िक्र ;
याद आने लगती हैं
बहन बुआ ,पड़ोस की
पूनम-छवि के साथ घटी
अमानवीय घटनाएँ !
ससुराल के नाम पर
दिखने लगती है
काले पानी की सजा ;
फिर शायद ह्रदय में यह
भय भी आता है कि
हमारी बिटिया को भी
सहने होंगे समाज के
कठोर ताने -”सावधान
तुम एक लड़की हो ”
किशोरी बनते ही तुम एक देह
मात्र रह जाओगी ,
पास से गुजरता पुरुष
तुम पर कस सकता है तंज
”यू आर सेक्सी ”
इतने पर भी तुम गौर न करो तो
एक तरफ़ा प्यार के नाम पर
तुम्हे हासिल करना चाहेगा ,
और हासिल न कर सका तो
पराजय की आग में स्वयं
जलते हुए तुम पर तेजाब
फेंकने से भी नहीं हिचकिचाएगा ;
इतने भय तुम्हारे जन्म के साथ
ही जुड़ जाते हैं इसीलिए
शायद लड़की के जन्म पर
परिवारीजन
उदास हो जाते हैं .
शिखा कौशिक
http://shikhakaushik666.blogspot.com



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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
February 25, 2015

आदरणीया डॉ. शिखा कौशिक जी ! बहुत सार्थक और विचारणीय कविता ! सभी दिक़्क़तों के वावजूद भी बेटी घर की शोभा है ! उसके लिए सारी परेशानियां झेलने को हममे से अधिकांशतः लोग तैयार हैं ! यही हमारे देश की खासियत है !

rajanidurgesh के द्वारा
February 25, 2015

शिखाजी , अत्यंत मर्मस्पर्शी एवं उत्कृष्ट आलेख बधाई

deepak pande के द्वारा
February 25, 2015

ोो आज की सच्चाई से रूबरू करती एक उत्कृष्ट रचना साभार रचना जी


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