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सातों सुर सातों रंग संग लाती है हर बिटिया !

Posted On: 22 Jan, 2015 social issues,Celebrity Writer में

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सातों सुर सातों रंग संग लाती है हर बिटिया !
बेसुरी बदरंग उसके बिन है ये सारी दुनिया !
…………………………………………………….
इसकी किलकारी इसकी मुस्कानें अंगना में लाती बहारें ,
ले लो गोदी ज़िद करती है , तब बरसें ठंडी फुहारें ,
नन्हें हाथों से ये लुटाती है भोली-भली हज़ारों खुशियां !
सातों सुर सातों रंग संग लाती है हर बिटिया !
बेसुरी बदरंग उसके बिन है ये सारी दुनिया !
……………………………………………………………
ये ही जननी है , ये ही पुत्री है ,ये ही पत्नी , यही है बहना ,
इसकी ममता का , समर्पण का ,स्नेह का क्या कहना ,
ये कली ही तो चटककर महका देती सारी बगिया !
सातों सुर सातों रंग संग लाती है हर बिटिया !
बेसुरी बदरंग उसके बिन है ये सारी दुनिया !
…………………………………………………………
इसके सपनों को सच करना है फिर भरेगी ये ऊँची उड़ान ,
इसको आने दो इस दुनिया में ये भी तो प्रभु का वरदान ,
अब चहकने दो मीठा-मीठा सा नन्ही चिड़िया सी प्यारी गुड़िया !
सातों सुर सातों रंग संग लाती है हर बिटिया !
बेसुरी बदरंग उसके बिन है ये सारी दुनिया !

डॉ. शिखा कौशिक ‘नूतन’



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5 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

तेज पाल सिंह के द्वारा
January 29, 2015

सातों सुर सातों रंग संग लाती है हर बिटिया ! बेसुरी बदरंग उसके बिन है ये सारी दुनिया ! शिखा जी, बहुत सही लिखा है आपने । बेटी है तो बहार है, बेटी घर का श्रृगार है । बेटियों में उत्साह अब दूना है, उन्हें आगे बढ़ आसमान छूना है ।। बधाई ।

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
January 27, 2015

शिखा जी सामयिक संदर्भों मे एक अच्छी कविता । उम्मीद है कल का सवेरा आज से कहीं बेहतर होगा ।

Shobha के द्वारा
January 26, 2015

प्रिय शिखा जी बहुत प्यारी कविता मुझे मेरी बेटी की बेटी जो अभी नन्हीं सी हैं याद दिला दी डॉ शोभा

ravindersingh के द्वारा
January 23, 2015

बहुत सुन्दर .पोस्ट शिखा जी—— बिना बेटी के हम अपने भविष्य भविष्य की कल्पना नहीं कर सकते – रविंदर सिंह

January 22, 2015

बहुत सुन्दर .


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