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शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

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* घूंघट की दीवारों में !*

Posted On: 16 Jan, 2015 Others,Celebrity Writer,Hindi Sahitya में

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क्यों कैद किया औरत को ?
घूंघट की दीवारों में ,
घुटती है ; सिसकती है ,
घूंघट की दीवारों में !
………………………………..
कुछ कर के दिखाने की ;
उसकी भी तमन्ना थी ,
दम तोड़ रही हर चाहत ;
घूंघट की दीवारों में !
………………………………………………
मुरझाया सा दिल लेकर ;
दिन-रात भटकती है ,
हाय कितना अँधेरा है !
घूंघट की दीवारों में !
………………………………..
घूंघट जो उठाया तो ;
बदनाम न हो जाये ,
डर-डर के रोज़ मरती है ;
घूंघट की दीवारों में !
…………………………………..
क्या फूंकना औरत को ;
मरघट पे है ले जाकर ,
जल-जल के खाक होती है ;
घूंघट की दीवारों में !

शिखा कौशिक ‘नूतन’



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9 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ravindersingh के द्वारा
January 19, 2015

जल-जल के खाक होती है ; घूंघट की दीवारों में !हार्दिक  आभार .शिखा जी,नारी घुटन को मार्मिक बनाया

yamunapathak के द्वारा
January 19, 2015

शिखा जी घूँघट का प्रतीकात्मक प्रयोग बेहद प्रभावकारी ढंग से प्रस्तुत हुआ है…. साभार

TEJ PAL SINGH के द्वारा
January 19, 2015

शिखा जी, एक मार्मिक कविता के लिए बधाई| निश्चित रूप से नारी पर लगी पाबंदियां उसे प्रगति नहीं करने देती।

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
January 18, 2015

घूंघट, प्रतीकात्मक नारी घुटन को मार्मिक बनाया है शिखा जी बधाई ओम शांति शांति 

Santlal Karun के द्वारा
January 18, 2015

आदरणीया शिखा जी, घूंघट की प्रतीकात्मकता में नारी मान-सम्मान के प्रति बेहद संवेदनात्मक कविता ; हार्दिक साधुवाद एवं सद्भावनाएँ ! — “कुछ कर के दिखाने की ; उसकी भी तमन्ना थी , दम तोड़ रही हर चाहत ; घूंघट की दीवारों में !”

Shobha के द्वारा
January 18, 2015

प्रिय शिखा जी बहुत सुंदर भावना पूर्ण कविता डॉ शोभा

Rajesh Kumar Srivastav के द्वारा
January 17, 2015

आज के सन्दर्भ में बकवास / अब सूट और टॉप में घूँघट कहाँ होते है / दुपट्टा भी मिलना बंद हो गया है /

    DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
    January 17, 2015

    आपके स्त्री-विरोधी सोच से वाकिफ हूँ .आप राजिस्थान व् उत्तर-प्रदेश के ग्रामीण अंचलों में जाकर देखें तब हकीकत से रूबरू होंगें . टिप्पणी के लिए हार्दिक आभार .

January 16, 2015

vicharatmak sarthak abhivyakti .aabhar


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