! अब लिखो बिना डरे !

शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

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'' कविता.. कविता सी लगे ''

Posted On: 11 Jan, 2015 Others,Junction Forum,Celebrity Writer में

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कैसे लिखूं कि कविता ;
एक कविता सी लगे ,
बहते हुए भावों की ;
एक सरिता सी लगे !
…………………………………
चंचल किशोरी सम जो ;
खिलखिलाए खुलकर ,
बांध ले ह्रदय को ;
नयनों के तीर चलकर ,
ऐसी रचूँ कि कुमकुम सी
मांग में सजे !
कैसे लिखूं कि कविता ;
एक कविता सी लगे !
………………………………..
हो मर्म भरी ऐसी ;
जो चीर दे उरों को ,
एक खलबली मचा दे ;
पिघला दे पत्थरों को ,
निर्मल ह्रदय जो कर दे ;
वो सुर लिए सधे !
कैसे लिखूं कि कविता ;
एक कविता सी लगे !
………………………………….
तितली का मनचलापन ;
सुरभि लिए कुसुम की ,
आशाओं के गगन में ;
वो चहके पाखियों सी ,
साहित्य के सदन में ;
शहनाई सी बजे !
कैसे लिखूं कि कविता ;
एक कविता सी लगे !

शिखा कौशिक ‘नूतन’



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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
January 16, 2015

कैसे लिखूं कि कविता ; एक कविता सी लगे !……….आपके सृजनात्मक चिंताओं और एहसासों से भरी एक सुंदर कविता । शिखा कौशिक जी आपको बधाई ।

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
January 14, 2015

मैं कहीं कवि न बन जाऊं तेरे प्यार मैं ओ कविता … डूब जाना इतना कि सब साकार लगे और तलासना श्रंगारिक भाव ,शब्द …जब जागो तो कविता बन जाती है ओम शांति शांति 

yamunapathak के द्वारा
January 14, 2015

बहुत खूबसूरत कविता है बिलकुल माथे पर चमकती कुमकुम सी ….बजती शहनाई सी ….. साभार

jlsingh के द्वारा
January 12, 2015

साहित्य के सदन में ; शहनाई सी बजे ! कैसे लिखूं कि कविता ; एक कविता सी लगे ! बेहद खूबसूरत आदरणीया शिखा जी!


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