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शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

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'अभी हार मत मानो !'

Posted On: 10 Jan, 2015 कविता,Celebrity Writer में

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असफलता से मिलेगी ;
राह सफलता की ,
है जरूरत नर नहीं ;
किंचित विकलता की ,
खुद में छिपी जो शक्ति है ,
उसको तो पहचानो !
अभी हार मत मानो !
……………………….
लूट गया सर्वस्व ;
अश्रु मत बहाओ तुम ,
होकर सचेत फिर उठो ;
न यूँ रहो गुमसुम ,
बिगड़े हुए काम को
ऐसे संवारो !
अभी हार मत मानो !
…………………………………..
गिर गए तो क्या हुआ ;
घुटने न टेको ,
असफल होकर पुनः ;
प्रयास कर देखो ,
जय मिलेगी एक दिन ;
सत्य को जानो !
अभी हार मत मानो !

शिखा कौशिक ‘नूतन’



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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yamunapathak के द्वारा
January 14, 2015

शिखा जी प्रेरणास्पद पंक्तियाँ हैं आभार


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