! अब लिखो बिना डरे !

शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

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माँ का चुम्बन !

Posted On: 24 Dec, 2014 कविता,Celebrity Writer में

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मेरे माथे पर

नरम -गरम

दो अधरों की छुअन ,

कितना पावन !

कितना पवित्र !

माँ का चुम्बन !

………………………………….

फैलाकर बाहें

माँ का घुटनों

तक झुक जाना ,

दौड़कर मेरा

माँ से लिपट जाना !

मातृत्व का अभिनन्दन !

कितना पावन !

कितना पवित्र !

माँ का चुम्बन !

………………………………………

ढिठाई पर पिटाई ,

मेरा रूठ जाना ,

माँ का मनाना ,

माँ का दुलार ,

ममता की फुहार !

माँ से शुरू

माँ पर ख़त्म !

मेरा बचपन !

कितना पावन !

कितना पवित्र !

माँ का चुम्बन !

शिखा कौशिक ‘नूतन ‘



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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Imam Hussain Quadri के द्वारा
December 25, 2014

बहुत खूब माँ के लिए जितना भी लिखा जाए वो कम है माँ के चरणो में स्वर्ग है काश लोग माँ को समझ लेते . बहुत बहुत बधाई हो .


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