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शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

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''सपने अभी और टूटेंगे ! ''

Posted On: 21 Dec, 2014 Others,कविता,Celebrity Writer में

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थोड़े आंसू बचा के रखना ,
दर्द दबा लेना इस दिल में ,
नहीं आखिरी गम ये अपना ,
सपने अभी और टूटेंगे !
………………………………..
किसे मनाएं मिन्नत कर के ,
कब तक मांगें रोज़ दुआएं ,
मौत के आगे बेबस होकर ,
अपने अभी कई छूटेंगें !
……………………………
नए ज़ख्म मिलते जाते हैं ,
पिछले भरते कहाँ यहाँ !
आहें रख सँभाल के अपनी ,
टीसों पर कब तक चीखेँगेँ !
…………………………….
ज़िंदा रहना है तो सुन लो ,
दिल को अपने सख़्त बना लो ,
हर एक हादसे पर ये बोलो ,
झुककर घुटने ना टेकेंगें !
…………………………………….
खिल्ली खूब उड़ा ले मौत ,
हमको भी आता है जीना ,
जब तक साँस चलेगी अपनी ,
जीने की मौज़े लूटेंगें !
…………………………………….
घुट-घुट कर न रोज़ मरेँगेँ ,
गम को नाक चिढ़ाएंगें ,
भले ज़िंदगी रूठे हमसे
हरगिज़ न पर हम रूठेंगें !

शिखा कौशिक ‘नूतन’



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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Imam Hussain Quadri के द्वारा
December 22, 2014

ज़िन्दगी ज़िंदा दिली का नाम है मुरदा दिल क्या खाक जिया करते हैं बहुत खूब आपने जो भी हिम्मत दिखाई है काश हम वैसे ही हो जाएँ बहुत अच्छे शेर हैं .


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