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शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

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कविता मात्र श्रृंगार नहीं !

Posted On: 1 Nov, 2014 कविता,Celebrity Writer में

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कोमल पुष्पों का हार नहीं ,
रसिक-नृप-दरबार नहीं ,
ये नूपुरों की झंकार नहीं ,
कविता मात्र श्रृंगार नहीं !
…………………………………
कविता नहीं सीमित नख -शिख तक ,
नारी की चंचल -चितवन तक ,
षड-ऋतुओं के वर्णन तक ,
कामोद्दीपक भावों तक ,
प्रेमी-युगलों को हर्षाती ;
केवल मदमस्त फुहार नहीं !
कविता मात्र श्रृंगार नहीं !
…………………………………….
कविता-शिव का पर्याय है ,
शिव में ब्रह्माण्ड समाये है ,
वही सत्य है वही सुन्दर है ,
आनंद का यही उपाय है ,
मानवता के आदर्शों का
स्थायी दृढ़ आधार यही !
कविता मात्र श्रृंगार नहीं !
……………………………………..
वीरों में भर देती साहस ,
मातृ -भूमि हित मिट जाओ ,
मत करो पलायन डर कर तुम ,
भले रणभूमि में कट जाओ ,
वीरों के कर में है सजती ,
शत्रु-मर्दन तलवार यही !
कविता मात्र श्रृंगार नहीं !
……………………………………….
करुणा से ह्रदय द्रवित करती ,
प्रफुल्लित उर को कर देती ,
कविता में हास-रुदन दोनों ,
जीवन में रंग यही भरती ,
कविता नहीं होती मधुशाला ,
पावन गंगा -सम धार यही !
कविता मात्र श्रृंगार नहीं !

शिखा कौशिक ‘नूतन ‘

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7 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

bhagwandassmendiratta के द्वारा
November 6, 2014

कविता में एक और कविता, अति सुन्दर अभिव्यक्ति, आपको बहुत बहुत बधाई व् अनेकों धन्यवाद, शिव तो सत्य हैं ही, जहाँ शिव हैं वहां चित एवं आनंद भी हैं| रचना जो चित को आनंदित कर दे तो रचनाकार बधाई का ही पात्र होता है| भगवन दास मेहंदीरत्ता

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
November 5, 2014

कविता के औचित्य और उद्देशय पर इस्से अच्छी दूसरी रचना नही हो सकती । बेहतर तरीके से आपने अपनी बात कही है । अच्छी पठनीय कविता ……..बधाई ।

deepak pande के द्वारा
November 4, 2014

कविता-शिव का पर्याय है , शिव में ब्रह्माण्ड समाये है , वही सत्य है वही सुन्दर है , आनंद का यही उपाय है , मानवता के आदर्शों का स्थायी दृढ़ आधार यही ! कविता मात्र श्रृंगार नहीं ! WAAH JAB KAVITA SWAYAM SHIV HAI TO KUCHH KEHNE KO BAAKI NAHEE RAHA SUNDER ABHIVYAKTI

jlsingh के द्वारा
November 3, 2014

वीरों में भर देती साहस , मातृ -भूमि हित मिट जाओ , मत करो पलायन डर कर तुम , भले रणभूमि में कट जाओ , वीरों के कर में है सजती , शत्रु-मर्दन तलवार यही ! कविता मात्र श्रृंगार नहीं ! सुन्दर !

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
November 3, 2014

करुणा से ह्रदय द्रवित करती , प्रफुल्लित उर को कर देती , कविता में हास-रुदन दोनों , जीवन में रंग यही भरती , सम्पूर्ण रचना का हर शब्द सार्थक ,बधाई शिखा जी .

Bhola nath Pal के द्वारा
November 1, 2014

डॉक्षिक्षा जी !स्थाई भाव ‘कविता मात्र श्रंगार नहीं ‘को व्यापक रूप देने का सफल प्रयाश I अच्छी कविता I सस्नेह ………

    ranjeetkk के द्वारा
    November 3, 2014

    करुणा से ह्रदय द्रवित करती , प्रफुल्लित उर को कर देती , कविता में हास-रुदन दोनों , जीवन में रंग यही भरती , कविता नहीं होती मधुशाला , पावन गंगा -सम धार यही ! कविता मात्र श्रृंगार नहीं !1 बहुत सुंदर रचना… कविता को बडी  सुंदरता से परिभाषित किया है आपने.


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