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शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

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''नारी तुम हो सुन्दरतम ''

Posted On: 27 Jun, 2014 Celebrity Writer,Hindi Sahitya में

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उसने कहा
तुम सुन्दर नहीं !
मन ने कहा
”तुम हो ”
तुम
काली घटाओं सम
शीतल ,
ममता से भरे हैं
तुम्हारे नयन ,
मंगल भावों से युक्त
तुम्हारा ह्रदय ,
निश्छल स्मित
से दीप्त वदन ,
सेवा हेतु पल-पल
उद्यत ,
आलस्य न
तुममें किंचित ,
इसलिए
जो कहे तुम्हें
”तुम सुन्दर नहीं ”
वो हो जाये
स्वयं लज्जित ,
तुम सृष्टि की रचना
अद्भुत ,
मोहनी भी तुम ,
कल्याणी भी तुम ,
तुमसे आलोकित
विश्व सकल ,
मन पुनः बोला
तुम नारी हो
”तुम हो सुन्दरतम ‘

शिखा कौशिक ‘नूतन’



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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

mayankkumar के द्वारा
June 29, 2014

भावि-विह्वल करती हुई सुंदर सी रचना। बेबाकी व सारगर्भ‍िता को नमन। हमारे ब्‍लॉग पर भी पधारें

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
June 28, 2014

नारी के अस्तित्व का बहुत सुंदर आंकलन,हार्दिक बधाई शिखा जी .

pkdubey के द्वारा
June 28, 2014

अतिउत्तम आदरणीया.


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