! अब लिखो बिना डरे !

शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

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खंडित आनंद

Posted On: 20 Jun, 2014 Others,कविता,Celebrity Writer में

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सब विश्वास हो जाते हैं चकनाचूर ,

निरर्थक हो जाती हैं प्रार्थनाएं ,

टूट जाता है मनोबल ,

आस्थाओं में पड़ जाती है दरार ,

खाली-खाली हो जाता है ह्रदय ,

भर आते हैं नयन ,

मान्यताएं लड़खड़ा जाती हैं ,

उखड़ जाते हैं आशाओं के स्तम्भ ,

झुलस जाती है हर्ष की फुलवारी ,

वाणी हो जाती है अवाक,

बुद्धि हो जाती है सुन्न ,

मनोभावों की अभिव्यक्ति

हो जाती है असंभव ,

अब भी जिज्ञासा है शेष

ये जानने की कि कब ?

तो सुनो !

ऐसा होता है तब

जब खो देते हैं हम

अपने प्रिय-जन को

सदा के लिए ,

जो देह-त्याग कर

स्वयं तो हो जाता है

अनंत में लीन

और खंड-खंड

कर जाता है हमारा

आत्मिक-आनंद

जो कदापि नहीं हो सकता

पुनः अखंड !!

शिखा कौशिक ‘नूतन’



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5 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sanjay kumar garg के द्वारा
June 23, 2014

जो देह-त्याग कर “स्वयं तो हो जाता है अनंत में लीन और खंड-खंड कर जाता है हमारा आत्मिक-आनंद” सुन्दर अभिव्यक्ति आदरणीया जी!

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
June 23, 2014

अपने प्यारो को चाह कर न बचा पाते हम ,ज़िन्दगी मौत से उस वक्त हार जाती है . यही विवशता है शिखाजी जब आनन्द खंडित होता है और विश्वास चकनाचूर,बहुत खूब ,मन की गहराई की व्यथा को उजागर करती उत्क्रष्ट रचना .

jlsingh के द्वारा
June 22, 2014

जीवन के सत्य से इंकार नहीं किया जासकता है …सार्थक अभिव्यक्ति!

sadguruji के द्वारा
June 20, 2014

जब खो देते हैं हम अपने प्रिय-जन को सदा के लिए , जो देह-त्याग कर स्वयं तो हो जाता है अनंत में लीन और खंड-खंड कर जाता है हमारा आत्मिक-आनंद जो कदापि नहीं हो सकता पुनः अखंड !! बहुत अच्छी कविता ! आपको बहुत बहुत बधाई !

June 20, 2014

nahi aata man me koi anya bhav sahmati ke सिवा .sarthak भावाभिव्यक्ति .बधाई


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