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शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

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'कलम क्या उसकी खाक लिखेगी !!'

Posted On: 17 Jun, 2014 Others,कविता,Celebrity Writer में

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नहीं हादसे झेले जिसने ,
आहें नहीं भरी हैं जिसने ,
अगर थाम ले कलम हाथ में ,
कलम क्या उसकी खाक लिखेगी !!
………………………………………..
पलकें न भीगीं हो जिसकी ,
आंसू का न स्वाद चखा हो ,
अगर लगे दर्द-ए-दिल गानें ,
दिल पर कैसे धाक जमेंगी !!
………………………………………………
नहीं निवाले को जो तरसा ,
नहीं लगी जिस पेट में आग ,
बासी रोटी खा लेने को ,
आंतें उसकी क्यों उबलेंगी !!

शिखा कौशिक ‘नूतन ‘



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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

एल.एस. बिष्ट् के द्वारा
June 19, 2014

नहीं हादसे झेले जिसने , आहें नहीं भरी हैं जिसने , अगर थाम ले कलम हाथ में , कलम क्या उसकी खाक लिखेगी !! अच्छी कविता

sanjay kumar garg के द्वारा
June 19, 2014

“जिसके पैर न पड़ी बिवाई, वो क्या जाने पीर पराई!” वास्तव में संवेदनहीन कुछ नहीं लिखा सकता! सुन्दर अभिव्यक्ति आदरणीया शिखा जी!

June 17, 2014

अगर लगे दर्द-ए-दिल गानें , दिल पर कैसे धाक जमेंगी !! ekdam sahi .poorntaya sahmat .


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