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शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

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मेरे वालिद ने रोज़ ऐसा इम्तिहान दिया

Posted On: 14 Jun, 2014 Celebrity Writer,Special Days में

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मेरे वालिद

ग़मों को ठोकरें मिटटी में मिला ही देती ,
मेरे वालिद ने आगे बढ़ के मुझे थाम लिया .
………………………………………………….
मुझे वजूद मिला एक नयी पहचान मिली ,
मेरे वालिद ने मुझे जबसे अपना नाम दिया .
………………………………………………….

मेरी नादानियों पर सख्त हो डांटा मुझको;
मेरे वालिद ने हरेक फ़र्ज़ को अंजाम दिया .
………………………………………………..
अपनी मजबूरियों को दिल में छुपाकर रखा ;
मेरे वालिद ने रोज़ ऐसा इम्तिहान दिया .
……………………………………………………….
खुदा का शुक्र है जो मुझपे की रहमत ऐसी ;
मेरे वालिद के दिल में मेरे लिए प्यार दिया .

शिखा कौशिक ‘नूतन ‘

http://shikhakaushik666.blogspot.com



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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Shobha के द्वारा
June 15, 2014

छोटी और सार गर्भित कविता अति सुन्दर शोभा

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
June 15, 2014

उर्दू लफ्ज़ों की खूबसूरती ही अलग होती है ,ऐसे ही शब्दों में सजी पिता के सम्मान में सुंदर रचना,बधाई

June 15, 2014

har beti ke man kee baat ko sundar shabd diye hain aapne .thanks a lot.


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