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इंसानियत क़ा दरिया

Posted On: 10 Jun, 2014 social issues,कविता,Celebrity Writer में

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किसी की आँख का आंसू
मेरी आँखों में आ छलके;
किसी की साँस थमते देख
मेरा दिल चले थमके;
किसी के जख्म की टीसों पे
मेरी रूह तड़प जाये;
किसी के पैर के छालों से
मेरी आह निकल जाये;
प्रभु ऐसे ही भावों से मेरे इस दिल को तुम भर दो,
मैं कतरा हूँ मुझे इंसानियत क़ा दरिया तुम कर दो.
किसी क़ा खून बहता देख
मेरा खून जम जाये;
किसी की चीख पर मेरे
कदम उस ओर बढ़ जाएँ;
किसी को देख कर भूखा
निवाला न निगल पाऊँ ;
किसी मजबूर के हाथों की
मैं लाठी ही बन जाऊं;
प्रभु ऐसे ही भावों से मेरे इस दिल को तुम भर दो,
मैं कतरा हूँ मुझे इंसानियत क़ा दरिया तुम कर दो.

शिखा कौशिक ‘नूतन’



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11 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
June 15, 2014

किसी क़ा खून बहता देख मेरा खून जम जाये; किसी की चीख पर मेरे कदम उस ओर बढ़ जाएँ; किसी को देख कर भूखा निवाला न निगल पाऊँ शिखा जी बहुत खूबसूरत भाव काश प्रभु आप की सुन लें और हम सब में ये गुण भर जाएँ तो समाज बदल जाए बहुत सुन्दर भ्रमर ५

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
June 15, 2014

डॉ शिखा जी क्या सीता या हरिश्चंद्र को पुनर्जीवन देकर दुखी करना चाह रही हैं अब कलियुग है ,सतयुग नहीं ओम शांति शांति शांति 

Udai Shankar Srivastava के द्वारा
June 15, 2014

बहुत अच्छी कविता , साधुवाद

Shobha के द्वारा
June 14, 2014

 अति सुन्दर भाव  कोमल भाव   शोभा

Sushma Gupta के द्वारा
June 14, 2014

वाह शिखा जी, बहुत ही सुन्दर एवं सुकोमल विचारों से सजी यह रचना मन को अंदर तक छू गई , वधाई..

deepak pande के द्वारा
June 14, 2014

प्रभु ऐसे ही भावों से मेरे इस दिल को तुम भर दो, मैं कतरा हूँ मुझे इंसानियत क़ा दरिया तुम कर दो. बहुत khoob shikha jee

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
June 13, 2014

किसी क़ा खून बहता देख मेरा खून जम जाये; किसी की चीख पर मेरे कदम उस ओर बढ़ जाएँ; किसी को देख कर भूखा निवाला न निगल पाऊँ ; किसी मजबूर के हाथों की मैं लाठी ही बन जाऊं;बहुत सुंदर भावनाओं का संकलन है ये आपकी कविता शिखा जी लिखती रहिये ,बधाई .

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
June 13, 2014

भावाभिभूत कर देने वाली रचना ! बधाई शिखा जी !!

Ravindra K Kapoor के द्वारा
June 13, 2014

सुन्दर शब्द एक सुन्दर मन से ही निकल सकते हैं. अच्छी भावनाओं की अभिव्यक्ति जब ह्रदय से निकलती है तो ईश्वर भी उसे सुनने की की ओर ध्यान देता है. सुभकामनाओं के साथ. रवीन्द्र के कपूर

sanjay kumar garg के द्वारा
June 11, 2014

“प्रभु ऐसे ही भावों से मेरे इस दिल को तुम भर दो” सुन्दर अभिव्यक्ति आदरणीया शिखा जी!

Veer Suryavanshi के द्वारा
June 10, 2014

“इंसानियत क़ा दरिया” बहुत ही सुन्दर मार्मिक एवं मानवता से परिपूर्ण रचना है बहुत अच्छा लिखा है आपको बधाई !!


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