! अब लिखो बिना डरे !

शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

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''सर्वकालिक विद्वता''

Posted On: 19 May, 2014 Celebrity Writer,Hindi Sahitya में

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”अंत ”

हाँ इस जीवन का अंत

निश्चित ,निःसंदेह होना ही है !

फिर भी

सुखों की लालसा में दूसरों को दुःख देना ,

अपने और अपने ही हित को देखना ,

मैं तो अमर हूँ ये सोचना ,

मृत्यु को धोखा देता ही रहूंगा !

दुसरे के विपदामयी जीवन पर मुस्कुराना !

मूर्खता है ,

कभी

गरीब को दुत्कारना ,

लोभवश अमीर को पुचकारना  ,

उनके साथ बैठकर गर्व का अनुभव करना ,

माया का जाल है !

तो

अब ये सोचो कैसे प्रभु के प्रिय बने ?

कैसे अपने ह्रदय में सिर्फ उनको धरें ?

ह्रदय में उनकी भक्ति बसाएं ,

उनकी भांति पूरे विश्व के प्रति ह्रदय में सद्भाव लाएं ?

ये ही विद्वता है

हाँ ! सर्वकालिक विद्वता !

शिखा कौशिक ‘नूतन’



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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
May 24, 2014

जीवन की क्षणभंगुरता का अहसास कराती आपकी रचना नैतिक मूल्यों का भी पाठ पढा रही है ,सार्थक रचना शिखाजी ,बधाई

SATYA SHEEL AGRAWAL के द्वारा
May 23, 2014

शिखा जी,बहुत ही सुन्दर कविता के माध्यम से जनता को जीवन की हकीकत का सन्देश दिया है

May 19, 2014

गहन चिंतन .


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