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शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

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ह्रदय की ज्योति

Posted On: 16 May, 2014 Celebrity Writer,Religious में

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कायरता की बात  मत  मुझसे किया करो ,

जब भी तुम भयभीत हो मुझसे मिला करो !

मैं तुम्हारे अंत:करण से सब भय मिटा दूंगा ,

मैं तुम्हारे ह्रदय में साहस-दीप जगा दूंगा !

मैं कौन हूँ ? मैं क्या हूँ ?मुझसे मत पूछो ,

मैं हूँ वही जिसके तुम प्रतिपल साथ रहते हो ,

कभी खुद ,कभी ईश्वर ,कभी रब -ईसा कहते हो !

सबके ह्रदय के भीतर  जो रोशनी हैं रहती  ,

पाप-कर्म के कारण मंद-मंद हैं रहती !

मैं वही हूँ ,तुम्हारी ही एक दिव्य-छवि हूँ !

और सुनो तुम्हारे पाप ही भय के कारण हैं ,

तुम छिपा सकते हो दुनिया से

पर मैं तो तुम्हारे ह्रदय की ज्योति हूँ

सब स्वयं  ही जान लेती हूँ !

चलो उठकर अपने पापों से तौबा कर लो ,

फिर देखो तनिक भी कायरता और भय न होगा

तुम प्रज्ज्वलित  दीपक के समान होगे

और सर्वत्र  तुम्हारे लिए स्वर्ग की तरह सुन्दर होगा !

शिखा कौशिक ‘नूतन’



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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Madan Mohan saxena के द्वारा
May 20, 2014

सुन्दर सार्थक और भाबमय रचना कभी इधर भी पधारें आभार मदन

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
May 19, 2014

स्वम् से साक्षात्कार कराती ,प्रेरणात्मक अभिव्यक्ति ,बधाई शिखाजी .

May 17, 2014

bahut sundar v sarthak abhivyakti .badhai


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