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शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

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'विश्वास'

Posted On: 13 May, 2014 Others में

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जिन्दगी ठहरती नहीं है;

चलती रहती है;

कभी धीरे -धीरे

कभी तेज रफ़्तार से;

वो मूर्ख है

जो ये सोचता है क़ि

एक दिन ऐसा आएगा क़ि

जिन्दगी रूकेगी और

उसे सलाम करेगी;

ऐसा कुछ नहीं होता;

क्योकि जिन्दगी एक

भागता हुआ पहिया है;

जो जब रूकता है

तो गिर पड़ता है;

जिन्दगी का रूकना ‘मौत ‘ है;

जो विद्वान है अथवा जिसे

थोडा भी ज्ञान है

वे करते हैं

जिन्दगी के साथ- साथ चलने

का प्रयास;

और कभी नहीं करते

इस पर ‘विश्वास’

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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
May 14, 2014

सच कहा ,मै सहमत हूँ आपके विचारों से ,शिखाजी ,हार्दिक बधाई


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