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मैं तेजाब नहीं गुलाब लाया हूँ -SHORT STORY

Posted On: 11 May, 2014 social issues,Celebrity Writer में

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मैं तेजाब नहीं गुलाब लाया हूँ -SHORT STORY

रानी  देख  सूरज  हाथ  पीछे  बांधे  हमारी  ही  ओर  बढ़ा  चला  आ  रहा  है  .तूने  उसके  साथ  प्यार  का  नाटक  कर  उसकी   भावनाओं  का  मजाक  उड़ाया  है  .कहीं  उसके  हाथ  में  एसिड  न  हो  .तुझे  क्या  जरूरत  थी  इस  तरह पहले  मीठी  बातें  कर  उसके  दिए  उपहार  स्वीकार  करने  की और  फिर  उससे ज्यादा अमीर वैभव   के  कारण   उसे  दुत्कारने की मैं तो जाती हूँ यहाँ से जो तूने किया है तू भुगत .’ ये कहकर गुलिस्ता वहाँ से चली गयी .रानी के चेहरे पर हवाइयाँ उड़ने लगी .सूरज के पास आते ही उसके पैरों में गिरकर गिडगिड़ाने लगी -” सूरज …मुझे माफ़ कर दो …मैंने तुम्हारे  प्यार का मजाक उड़ाया है …पर ..पर मुझ पर एसिड डालकर  मुझे झुलसाना नहीं …..प्लीज़ !!” ये कहते कहते वो रोने लगी .सूरज ने अपने पैर पीछे हटाते हुए ठहाका लगाया .वो भावुक होता हुआ बोला -” मिस रानी ऊपर देखिये ….मैं तेजाब नहीं गुलाब लाया हूँ ..आपको अंतिम भेंट देने के लिए और शुक्रिया ऊपर वाले का जिसने आप जैसी मक्कार लड़की से मुझे बचा लिया .यहाँ से जाकर मंदिर में प्रसाद भी चढ़ाना है ..लीजिये जल्दी से ये गुलाब थाम लीजिये .”  सूरज की बात सुनकर रानी के दम में दम आया और उसने शर्मिंदा होते हुए उठकर वो गुलाब थाम लिया .


शिखा कौशिक ‘नूतन ‘



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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
May 15, 2014

अच्छी लघु कथा प्रेम में धोखा और मजाक कतई न हो ….एक नए मोड़ और आयाम पर लिखा आप ने भ्रमर ५

Udai Shankar Srivastava के द्वारा
May 15, 2014

ज्वलंत समस्या पर एक अच्छी सीख | बधाई |

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
May 15, 2014

लडकों द्वारा किये अपराधों के पीछे का सच बताने वाली लघु कथा लिखी है आपने ,छोटी सी क्रिस्प रचना पर बहुत बड़ा सबक दे रही है कि किसी की भावनाओं के साथ मत खेलो ,बधाई शिखाजी


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