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शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

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'दर्द से दिल मेरा फटने लगा '

Posted On: 14 Apr, 2014 social issues,Celebrity Writer में

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मेरे ख्वाबों का कद बढ़ने लगा मुझको सजा दो ,
मुझे घर जेल सा लगने लगा मुझको सजा दो !
…………………………………………………………
मिली तालीम मैंने भी पकड़ ली हाथ में कलम ,
मेरा हर दर्द बयां होने लगा मुझको सजा दो !
………………………………………………………………..
लांघकर चौखटे रखा जो कदम मैंने हिम्मत से ,
खौफ दुनिया का है घटने लगा मुझको सजा दो !
…………………………………………………………
उठा पर्दा जो आँखों से दिखा अपना वज़ूद तब ,
सोया अरमान हर जगने लगा मुझको सजा दो !
…………………………………………………………………..
मुझे अब चीखना पुरजोर ‘नूतन’ इस ज़माने में ,
दर्द से दिल मेरा फटने लगा मुझको सजा दो !

शिखा कौशिक ‘नूतन’

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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sanjay kumar garg के द्वारा
April 16, 2014

“मिली तालीम मैंने भी पकड़ ली हाथ में कलम , मेरा हर दर्द बयां होने लगा मुझको सजा दो !” सुन्दर प्रस्तुति आदरणीया शिखा जी!

April 14, 2014

bahut hi bhavnatmak abhivaykti .

    archu के द्वारा
    April 22, 2014

    बेहतरीन


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