! अब लिखो बिना डरे !

शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

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''औरत से खेलता है मर्द ''

Posted On: 29 Mar, 2014 social issues,Celebrity Writer में

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औरत से खेलता है मर्द उसे मान खिलौना ,

औरत भी जानदार है नहीं बेजान खिलौना !

…………………………………………………….

नज़र उठी तो देख लिया आसमान पूरा ,

झुकी नज़र जो जानती थी पलक भिगोना !

………………………………………………..

आज कलम थामकर लिखती हकीकत ,

उँगलियाँ जो जानती थी दूध बिलौना !

…………………………………………..

लब हिले तो दास्ताँ दर्द की बयान की ,

सिले हुए दबाते रहे ज़ख्म घिनौना   !

………………………………..

‘नूतन’ वे चल पड़ी पथरीली राह पर ,

उनको नहीं भाता है अब उड़न-खटोला !

शिखा कौशिक  ’नूतन’

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
April 3, 2014

नज़र उठी तो देख लिया आसमान पूरा ,झुकी नज़र जो जानती थी पलक भिगोना .आज कलम थाम कर ……… शिखा जी आपकी रचनाओं में नारी के अनकहे दर्द का सटीक चित्रण होता है ,बहुत उम्दा अभिव्यक्ति ,बधाई .

March 29, 2014

आज कलम थामकर लिखती हकीकत , उँगलियाँ जो जानती थी दूध बिलौना ! bahut sahi likha .


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