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शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

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''.. चौखट न पार करना ''

Posted On: 24 Mar, 2014 social issues,Celebrity Writer में

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बस इतना याद रखना चौखट न पार करना ,
मेरा लिहाज़ रखना चौखट न पार करना !
……………………………………………………….
आँगन,दीवार,छत हैं कायनात तेरी ,
इसमें जीना-मरना चौखट न पार करना !
………………………………………………
खिदमत करे शौहर की बेगम का है मुकद्दर ,
सब ज़ुल्म मेरे सहना चौखट न पार करना !
………………………………………………………
नाज़ुक कली सी हो तुम बेबस हो तुम बेचारी ,
मेरी पनाह में रहना चौखट न पार करना !
…………………………………………….
ढक -छिप के जो है रहती औरत वही है ‘नूतन’
गैरों से पर्दा करना चौखट न पार करना !

शिखा कौशिक ‘नूतन’



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6 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sadguruji के द्वारा
March 29, 2014

आदरणीया डॉक्टर शिखा कौशिक ‘नूतन’ जी,बहुत अच्छी व्यंग्य रचना.अंत में आपने कहा है-ढक -छिप के जो है रहती औरत वही है ‘नूतन’ गैरों से पर्दा करना चौखट न पार करना !समाज में स्त्री कि दशा और पुरुष की मानसिकता का सजीव चित्रण.आपको बहुत बहुत बधाई.

yamunapathak के द्वारा
March 28, 2014

सुन्दर

abhishek shukla के द्वारा
March 28, 2014

ये चौखट सिर्फ औरतों के लिए ही क्यों?

sanjay kumar garg के द्वारा
March 26, 2014

सार्थक प्रस्तुति! आदरणीय शालिनी जी!

March 24, 2014

bahut khoob shikha ji .

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
March 24, 2014

आगन दिवार छत है कायनात तेरी इसमें है जीना मरना चौखट न पर करना ,बहुत खूब ,शिखा जी पुरुष की मानसिकता का सटीक उल्लेख ,सादर बधाई


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