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शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

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सियासत को अगर समझो जुबानें बंद रहने दो !

Posted On: 23 Mar, 2014 Politics,Celebrity Writer में

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सियासत को अगर समझो जुबानें बंद रहने दो !

खिलाफत मत करो समझो जुबानें बंद रहने दो !

……………………………………………………..

बड़ी मक्कारियाँ कर के हवा अपनी बनाई है ,

बनो नादान मत यारों जुबानें बंद रहने दो !

………………………………………………..

मिला जो तख़्त तुमको भी नवाजेंगे ईनामों से ,

हमारी चाल चलने दो जुबानें बंद रहने दो

…………………………………………..

खफा होना है हो जाओ झुकेंगे हम नहीं हरगिज़ ,

इशारों को समझ जाओ जुबानें बंद रहने दो !

…………………………………………………..

हमेशा काटते शागिर्द ही उस्ताद की गर्दन ,

ये ‘नूतन’ सबको बतलाओ जुबानें बंद रहनें दो !

शिखा कौशिक ‘नूतन’



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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sanjay kumar garg के द्वारा
March 28, 2014

आदरणीया शिखा जी, सुंदर ग़ज़ल “जुबाने बाद रहने दो” आभार!

meenakshi के द्वारा
March 27, 2014

सियासत को अगर समझो जुबानें बंद रहने दो ! बड़ी रोचक रचना .शिखा कौशिक ‘नूतन’ जी बधाई !

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
March 27, 2014

हक़ीक़त बयां करती एक मुकम्मल ग़ज़ल ! बधाई शिखा जी !

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
March 23, 2014

हमेशा काटते शागिर्द ही उस्ताद की गर्दन -बहुत उम्दा पंक्तियाँ शिखाजी सादर बधाई .


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