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शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

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होली है ..होली है !

Posted On: 15 Mar, 2014 Celebrity Writer,Special Days में

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होली पर्व की हार्दिक शुभकामनायें !
होली पर्व की हार्दिक शुभकामनायें !
बरसाने  वाली छोरी , ब्रज आई खेलन होली   ,
ब्रज का छोरा छिप-छिप कर खेले है आँख-मिचौली !
…………………………………………………
घर-घर में ढूंढें राधा कान्हां है छिपा कहाँ पर ,
फिर जमुना तट पर खोजा पाया ना उसे वहाँ पर ,
वो जगत -खिलावन वाला करता है खूब ठिठौली !
बरसाने  वाली छोरी , ब्रज आई खेलन होली   !
…………………………………………………..
कान्हां के मित्र-सखागण हँसते हैं राधा-दल पर ,
कुढ़ती-चिढ़ती रह जाती हाथों को मल-मल-मल कर ,
तभी पड़ी कदम्ब पर दृष्टि और देखि छवि सलोनी !
बरसाने  वाली छोरी , ब्रज आई खेलन होली   !
………………………………………………………….
कान्हां के मुख-दर्शन से झुलसी कलियाँ मुस्काई ,
राधा के मनमोहन ने फिर मुरली मधुर बजाई ,
पिचकारी लेकर राधा कान्हां को रंगने दौड़ी !
बरसाने  वाली छोरी , ब्रज आई खेलन होली   !
………………………………………………….
कान्हां को रंग दिया हाय मल -मल कर लाल गुलाल ,
फिर कान्हां ने रंग डाले राधा के गोरे गाल ,
अजी होरी है जी होरी ; होरी में कैसी चोरी !
बरसाने  वाली छोरी , ब्रज आई खेलन होली   !

जागरण जंक्शन ब्लॉग्स में १७ मार्च २०१४ को प्रकाशित
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शिखा कौशिक ‘नूतन’


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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

    DR. SHIKHA KAUSHIK के द्वारा
    March 20, 2014

    थैंक्स योगी जी .

March 16, 2014

बहुत सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति .होली की हार्दिक शुभकामनाएं

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
March 15, 2014

राधा कृष्ण की होली का जीवंत बर्णन,होली के त्यौहार पर मन को विभोर करती कविता ,होली की शुभ मंगल कामनाएं एवं हार्दिक बधाई


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