! अब लिखो बिना डरे !

शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

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मगर ख्वाहिश न करना मेरा ख़ुदा बनने की !!

Posted On: 13 Mar, 2014 social issues,Celebrity Writer में

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Beautiful Indian bride looking in mirror - stock photo

है इज़ाजत तुम्हें पंख लगा उड़ने की ,

मगर कोशिश न करना मुझसे ऊँचा उड़ने !

………………………………………………

है इज़ाजत तुम्हें जज़्बात बयां करने की ,

मगर हिम्मत न करना राज़ बयां करने की !

………………………………………………..

है इज़ाजत तुम्हें सजने और संवारने की ,

मगर चाहत न रखना बेपर्दा फिरने की !

……………………………………………….

है इज़ाजत तुम्हें मुझसे बात करने की ,

मगर हिमाकत न कभी करना बहस करने की !

……………………………………………

है इज़ाजत ‘नूतन’ शरीक-ए-हयात बनने की ,

मगर ख्वाहिश न करना मेरा ख़ुदा बनने की !!

शिखा कौशिक ‘नूतन’



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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sanjay kumar garg के द्वारा
March 15, 2014

वास्तव में हमें अपनी सीमायों को नहीं भूलना चाहिए, सुन्दर काव्यमय अभिव्यक्ति के लिए आभार! आदरणीय जी!

Madan Mohan saxena के द्वारा
March 13, 2014

सुन्दर ग़ज़ल ,हर शेर बेहतर होली की अग्रिम शुभकामना आभार मदन कभी इधर भी पधारें

March 13, 2014

satya likha hai shikha ji koi bhi pati apni patni ko apne se aage badhte hue nahi dekh sakta .

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
March 13, 2014

बहुत उम्दा ख्याल ,शिखा जी अगर लोग अपनी सीमाओं में रहें तो रिश्ते अटूट,कालजयी एवं सनातन बन जाएँ ,सादर बधाई


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