! अब लिखो बिना डरे !

शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

557 Posts

1412 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 12171 postid : 712867

सीता पे लांछन था लगा ,रावण ने उनको क्यूँ हरा ?

Posted On: 5 Mar, 2014 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

पिछली एक पोस्ट

[समर -भूमि से वीर नहीं करते हैं कभी पलायन]

पर श्री दुली चंद करेल जी की ये टिप्पणी प्राप्त हुई -


बारम्बार बनावट ने सत्य को रौंदा है।

रावण नीच तो सीता पवित्र कैसे?


अब ऐसे कुत्सित -विचारों का क्या उत्तर दिया जाये ?माता सीता की पवित्रता पर इस प्रकार के लांछन लगाना कोई नयी बात नहीं .माता सीता ने क्यूँ लांघी लक्ष्मण -रेखा और १६ दिसंबर २०१२ को सामूहिक दुष्कर्म की शिकार दामिनी के रात्रि में घूमने पर पुरुष -वर्ग ऊँगली उठाता ही रहा है .मर्यादा का प्रहरी पुरुष वर्ग अपनी करनी पर जरा भी ध्यान देता तो न सिया-हरण होता न द्रौपदी का चीर-हरण पर दुःख की बात है पुरुष-वर्ग हर बार स्त्री को ही दोषी ठहरा देता है


……………………………………………………………….

सीता पे लांछन था लगा ,रावण ने उनको क्यूँ हरा ?

बीते हज़ारो वर्ष पर ये घाव अब तक है हरा !

……………………………….

कामी ,लम्पट ,कापुरुष ने ; छल-युक्त कर्म था किया ,

महापुरुष श्री राम से प्रतिशोध इस भांति लिया ,

पाप था दशशीश का ; दंड सीता ने भरा !

बीते हज़ारो वर्ष पर ये घाव अब तक है हरा !

………………………………………………..

कट गए रावण के सिर ; हुई धर्म की स्थापना ,

पितृ-सत्ता से हुआ ; सियाराम का तब सामना ,

अग्नि-परीक्षा लेने का राम ने निर्णय करा !

बीते हज़ारो वर्ष पर ये घाव अब तक है हरा !

……………………………………………………..

सीता के एक स्पर्श से अग्नि भी पावन हो गयी ,

श्री राम की अर्द्धांगिनी सीता महारानी भयी ,

लेकिन सिया की शुद्धि पर संदेह -जलद फिर आ घिरा !

बीते हज़ारो वर्ष पर ये घाव अब तक है हरा !

…………………………………………………….

है यही अब प्रचलित श्री राम ने त्यागी सिया ,

पर बहुत सम्भव सिया ने अवध-त्याग स्वयं किया ,

स्वाभिमानी जानकी पर तर्क ये उतरे खरा !

बीते हज़ारो वर्ष पर ये घाव अब तक है हरा !

……………………………………………………………

सीता को वापस लाने का पुनः खेल था रचा गया ,

शुद्धि -परीक्षा का पुनः आग्रह किया गया ,

सीता के प्राण ले लिए पर दम्भ नर का न मरा !

बीते हज़ारो वर्ष पर ये घाव अब तक है हरा !

…………………………………………………….

त्रेता हो या कलियुग ; धरा पर राज नर ही कर रहे ,

रावण-दुशासन रूप नर हर युग में छलकर धर रहे ,

अपने किये दुष्कर्म का आरोप नारी सिर धरा !

बीते हज़ारो वर्ष पर ये घाव अब तक है हरा !

शिखा कौशिक ‘नूतन



Tags:

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 4.50 out of 5)
Loading ... Loading ...

4 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yamunapathak के द्वारा
March 10, 2014

शिखा जी एक सशक्त रचना साभार

Ritu Gupta के द्वारा
March 8, 2014

कड़वे सच्च को बयान करती उम्दा कविता बधाई शिखा जी

March 5, 2014

ekdam satya kaha hai aapne .sarthak abhivyakti .badhai


topic of the week



latest from jagran