! अब लिखो बिना डरे !

शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

569 Posts

1437 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 12171 postid : 707742

''मृत्यु की अभिलाषा !''

Posted On: 23 Feb, 2014 कविता,Celebrity Writer में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

टूटे जब स्वप्नों की माला आशा भये निराशा ,
तब रह जाती शेष केवल मृत्यु की अभिलाषा !
……………………………………………………
चिर-वियोग जब प्रियजनों का सहना पड़ता भारी ,
पल-पल पीड़ा शूल चुभाती निर्मम अत्याचारी ,
बहते अश्रु मुख पर लिखते जीवन की परिभाषा !
तब रह जाती शेष केवल मृत्यु की अभिलाषा !
………………………………………………………..
हर लेता जब रावण सीता पंचवटी में छल से ,
कमल-नयन तब भर आते व्यथित हो अश्रु-जल से ,
धीर-वीर-गम्भीर राम भी झेलें गहन हताशा !
तब रह जाती शेष केवल मृत्यु की अभिलाषा !
……………………………………………………
भेद न पाएं लक्ष्य जब-जब लज्जित होते हैं हम ,
शत्रु छोड़ें व्यंग्य-वाण घायल होता अंतर्मन ,
अपमानों के जोखिम वाला जीवन एक तमाशा !
तब रह जाती शेष केवल मृत्यु की अभिलाषा !

शिखा कौशिक ‘नूतन’



Tags:

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

1 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

February 24, 2014

चिर-वियोग जब प्रियजनों का सहना पड़ता भारी , पल-पल पीड़ा शूल चुभाती निर्मम अत्याचारी , बहते अश्रु मुख पर लिखते जीवन की परिभाषा ! तब रह जाती शेष केवल मृत्यु की अभिलाषा ! bahut sundar bat kahi hai aapne .


topic of the week



latest from jagran