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शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

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कितना खोया कितना पाया आओ करें हिसाब !

Posted On: 18 Feb, 2014 Celebrity Writer,lifestyle में

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जीवन का बहीखाता खोला काम करें ये खास ,
कितना खोया कितना पाया आओ करें हिसाब !
…………………………………………………….
कितने आंसू आँख से टपके गिनना जरा संभलकर ,
कितनी आहेँ कितनी चीखें निकली तड़प-तड़प कर ,
कितनी बार भरी घुट-घुट कर लम्बी-गहरी सांस !
कितना खोया कितना पाया आओ करें हिसाब !
……………………………………………………
कितना भीगे ममता मेह में कितना नेह लुटाया ,
कितना प्रेम किया अपनों से वापस कितना पाया ,
कितनी बार भरोसा टूटा कब-कब टूटी आस !
कितना खोया कितना पाया आओ करें हिसाब !
……………………………………………………………
कितनी बार खिले अधरों पर मुस्कानों के फूल ,
कितने स्वप्न सजे नयनों में सतरंगी सावन झूल ,
हुए प्रफुल्लित कितनी बारी कब-कब भये उदास !
कितना खोया कितना पाया आओ करें हिसाब !

शिखा कौशिक ‘नूतन’



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
February 21, 2014

कितना भीगे ममता मेह में कितना नेह लुटाया , कितना प्रेम किया अपनों से वापस कितना पाया , कितनी बार भरोसा टूटा कब-कब टूटी आस ! कितना खोया कितना पाया आओ करें हिसाब आदरणीया डॉ शिखा जी ..सुन्दर भाव ….काश हम इन सब बातों का ध्यान रख जिंदगी कि राह पर चलते चलें तो आनंद और आये … भ्रमर ५

February 19, 2014

बहुत सुन्दर भावनात्मक अभिव्यक्ति .


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