! अब लिखो बिना डरे !

शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

570 Posts

1437 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 12171 postid : 701510

प्रेममय होकर मनुज बनता स्वयं भगवान् है !

Posted On: 10 Feb, 2014 कविता,Celebrity Writer,Special Days में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

जिसके वशीभूत हो प्रभु ने जगत ये रच दिया ,
कृष्ण की बंसी बजी किसने इसे ये सुर दिया ?
हर ह्रदय में बस रहा वो भाव जो वरदान है ,
पवित्र व् कल्याणमय ”प्रेम” उसका नाम है !
………………………………………………………
प्रेम की शक्ति से ही सृष्टि का ये विस्तार है ,
हर मनुज उर में सदा बहती यही रस-धार है ,
नलिनी-सम सौंदर्ययुक्त आकार-निराकार है ,
त्रिलोक की संजीवनी ये जगत आधार है ,
जिसके उदित होते मिटे स्वार्थ का अभिमान है !
पवित्र व् कल्याणमय ”प्रेम” उसका नाम है !
…………………………………………………….
गौरा बनकर अर्पणा हो गयी भोलेनाथ की ,
लक्ष्मी-नारायण मिले श्रीराम संग हैं जानकी ,
कृष्ण-राधा के हुए मीरा हुयी घनश्याम की ,
ये सभी साकार रचना प्रीती-प्रेम भाव की ,
नारी-नर मिलन का हेतु भाव जो महाप्राण है !
पवित्र व् कल्याणमय ”प्रेम” उसका नाम है !
……………………………………………..
शब्दहीन जिसकी भाषा बोलते दो नैन हैं ,
कर्ण सुन रहें है सब रसना किन्तु मौन है ,
जो प्रिया के मुख -कमल पर लाली बन विराजती ,
प्रेम की ये भावना रूप को निखारती ,
श्रृंगार सुन्दरतम यही नयन -अभिराम है !
पवित्र व् कल्याणमय ”प्रेम” उसका नाम है !
……………………………………..
द्वेष के खडग को जो आगे बढ़ के काटती ,
भेदभाव -खाई को भली प्रकार पाटती ,
पाप के समुन्द्र में फंस गए यदि कभी ,
पुण्य-नौका प्रीती की भव -निधि से तारती ,
व्यष्टि पर समष्टि की जीत ये महान है !
पवित्र व् कल्याणमय ”प्रेम” उसका नाम है !
…………………………………………………..
त्याग व् कल्याण ही जिस पिता के पुत्र हैं ,
करुणा व् उदारता जैसी न अन्यत्र है ,
जो अहम् से मुक्त सर्वत्र जिसका मान है ,
सब भाव मिलकर पूजते देते इसे सम्मान हैं ,
अमृत -तुल्य ”प्रेम-पत्र” मानवता की पहचान है !
पवित्र व् कल्याणमय ”प्रेम” उसका नाम है !
…………………………………………………………..
होली आई-होली आई प्रेम रंग चढ़ गया ,
राखियों के रूप में कलाई पर है बांध गया ,
ईद के मौके पे आ जो गले से लग गया ,
दीपावली में एक एक प्रेम दीप सज गया ,
है मनुज केवल मनुज हिन्दू न मुसलमान है !
पवित्र व् कल्याणमय ”प्रेम” उसका नाम है !
…………………………………………………
प्रेम श्रद्धा ,प्रेम-मान ,प्रेम-सदाचार है ,
प्रेम-दया ,प्रेम-कृपा ,प्रेम ही उपकार है ,
प्रेम-अनल ,प्रेम-अनिल ,प्रेममय संसार है ,
प्रेम-धरा ,प्रेम गगन ,प्रेम जल की धार है ,
प्रेम सम प्रेम ही प्रेम के समान है !
पवित्र व् कल्याणमय ”प्रेम” उसका नाम है !
……………………………………………………..
जो सखा ,जो प्रिय ,जिसका ह्रदय में वास है ,
श्वास-श्वास में रमा जो अटल-विश्वास है ,
जो सुगंध प्रसून की , न बुझने वाली प्यास है ,
प्रेम-मानव देह में प्रभु का अमर-आभास है ,
प्रेममय होकर मनुज बनता स्वयं भगवान् है !
पवित्र व् कल्याणमय ”प्रेम” उसका नाम है !

शिखा कौशिक ‘नूतन’



Tags:

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

2 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
February 11, 2014

आध्यात्मिकता की गंध से सुवासित सुन्दर काव्यात्मक प्रस्तुति !शिखा जी बधाई !

Nirmala Singh Gaur के द्वारा
February 11, 2014

डॉ  शिखा जी ,क्या कविता रची है आपकी लेखनी ने ,उत्कृष्ट ,सुंदर ,सत्य एवं स्तरीय . बहुत बधाई , सादर , nirmal


topic of the week



latest from jagran