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जीवन के अर्णव में डूबे ढूंढी दो पहचानें !

Posted On: 6 Feb, 2014 Celebrity Writer,lifestyle में

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जीवन के अर्णव में डूबे ढूंढी दो पहचानें !
आँखों में आंसू के मोती अधरों पर मुस्कानें !
………………………………………………………………….
आशा का उज्ज्वल प्रभात व् गहन निराशा -तम भी ,
नवजात शिशु की किलकारी व् मृत्यु का मातम भी ,
एक हवेली जीवन जिसमें सुख-दुःख के तहखाने !
आँखों में आंसू के मोती अधरों पर मुस्कानें !
…………………………………………………….
स्वप्नों की मेंहदी रचती व् उजड़े मान किसी की ,
एक के सिर पर सेहरा सजता अर्थी उठे किसी की ,
मीठा-कड़वा फल-जीवन जो चूसे वो ही जाने !
आँखों में आंसू के मोती अधरों पर मुस्कानें !
………………………………………………….
मेहनत कर एक हाड़ गलाता दो रोटी न पाता ,
बिन मेहनत के कोई कोई मेवे रोज़ चबाता ,
कोई पीटता छाती अपनी कहीं गाने और बजाने !
आँखों में आंसू के मोती अधरों पर मुस्कानें !

शिखा कौशिक ‘नूतन’



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सच को सच लिखा और किस खूबसूरती से…शब्दश: जीवन-यथार्थ के दर्पण को दिखलाती आपकी इस उल्ल्लेख्नीय प्रस्तुति की तारीफ के लिये शब्द नहीं मेरे पास.. हैट्स ऑफ..शिखा जी..

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
February 11, 2014

आशा का उज्ज्वल प्रभात व् गहन निराशा -तम भी , नवजात शिशु की किलकारी व् मृत्यु का मातम भी , एक हवेली जीवन जिसमें सुख-दुःख के तहखाने ! आँखों में आंसू के मोती अधरों पर मुस्कानें ! ……………………………………………………. आदरणीया नूतन जी …बहुत सुन्दर रचना ..एक से बढ़ एक पंक्ति ….जीवन की अद्भुत झलक … भ्रमर ५

jlsingh के द्वारा
February 6, 2014

मेहनत कर एक हाड़ गलाता दो रोटी न पाता , बिन मेहनत के कोई कोई मेवे रोज़ चबाता , कोई पीटता छाती अपनी कहीं गाने और बजाने ! आँखों में आंसू के मोती अधरों पर मुस्कानें जी यही तो दुनिया है सुन्दर और करुणअभिव्यक्ति!


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