! अब लिखो बिना डरे !

शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

576 Posts

1449 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 12171 postid : 696846

कविता-''नेता जी है धरने पर !''[contest ]

Posted On: 30 Jan, 2014 Contest,Celebrity Writer में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

बैन है जीने मरने पर ,
नेता जी है धरने पर !
हाई फीवर ऑनेस्टी का
आता नहीं उतरने पर !!
……………………………….
नेता जी का है ऐलान ,
नहीं सहेंगे वे अपमान ,
होगा सड़कों पर सब काम ,
लोकतंत्र का लेकर नाम ,
बिन पानी के बादल बनकर
जोर है खूब गरजने पर !
नेता जी है धरने पर !
…………………………….
वो जो करते वही सही है ,
नेता जी ने कहा यही है ,
ध्वस्त व्यवस्था को कर देंगें ,
वरना इनका नाम नहीं है ,
हम हैं असली ‘आम आदमी ‘
लगे हैं साबित करने पर !
नेता जी है धरने पर !
………………………………….
आम आदमी की सरकार
आम आदमी ही लाचार ,
धरने , अनशन , नारेबाज़ी ,
कैसे पाये इनसे पार ?
बाँध के मफलर पहन के टोपी
झाडू फेरी सपनों पर !
नेता जी है धरने पर !

शिखा कौशिक ‘नूतन’



Tags:

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

4 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Ritu Gupta के द्वारा
February 1, 2014

लाजवाब कविता सच्चाई का का समर्थन करती आभार

Rajesh Kumar Srivastav के द्वारा
February 1, 2014

सब छलावा है / दिल्ली के लोग इनके झांसे में कैसे आ गए सोचनीय है /

sanjay kumar garg के द्वारा
January 31, 2014

“हाई फीवर ऑनेस्टी का, आता नहीं उतरने पर !!” बहुत सुन्दर, आदरणीय शिखा जी! सादर आभार!

January 31, 2014

हा हा हा …..बहुत सुन्दर


topic of the week



latest from jagran