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कविता 'कहना अवध से हे लखन ! सीता न वापस आएगी '[contest ]

Posted On: 28 Jan, 2014 Contest,Celebrity Writer में

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रघुकुल के उज्ज्वल भाल पर कालिख न लगने पायेगी !
कहना अवध से हे लखन ! सीता न वापस आएगी !!
………………………………………………………
मेरे ह्रदय में हर घड़ी मेरे प्रभु का वास है ,
मेरे प्रभु को भी मेरी शुद्धि पर विश्वास है ,
बस ये तसल्ली उर में ले वनवास सीता जायेगी !
कहना अवध से हे लखन ! सीता न वापस आएगी !!
……………………………………………………..
अपवाद जिस दिन से उठा मेरे प्रभु गम्भीर थे ,
सीता की निंदा हो रही ये सोचकर अधीर थे ,
अपने प्रिय के शोक का कारण नहीं कहलायेगी !
कहना अवध से हे लखन ! सीता न वापस आएगी !!
………………………………………………..
विष पी रहे प्रभु मेरे नीलकंठ बन ,
इसीलिए मैं कर रही वन को हूँ गमन ,
राम की अर्द्धांगिनी अपना वचन निभाएगी !
कहना अवध से हे लखन ! सीता न वापस आएगी !!
…………………………………………….
गर्भ में प्रभु-अंश है जन्म देगी उसको जब ,
रघुकुल का वो गौरव बने ऐसी शिक्षा देगी सब ,
नारी को सम्मान दो सीता उसे सिखाएगी !
कहना अवध से हे लखन ! सीता न वापस आएगी !!

शिखा कौशिक ‘नूतन’



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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

pkdubey के द्वारा
July 28, 2014

बहुत प्रेरणादायक कृति.सादर बधाई.

jlsingh के द्वारा
January 30, 2014

गर्भ में प्रभु-अंश है जन्म देगी उसको जब , रघुकुल का वो गौरव बने ऐसी शिक्षा देगी सब , नारी को सम्मान दो सीता उसे सिखाएगी ! कहना अवध से हे लखन ! सीता न वापस आएगी !! नारी को सम्मान मिला क्या? आदरणीया कविता के शब्द विन्यास भाव महत्वपूर्ण है …पर प्रश्न आज भी अनुत्तरित है. सादर!


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