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मुझे माफ़ कर दो माँ -लघु कथा [contest ]

Posted On: 22 Jan, 2014 Contest,Celebrity Writer में

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mother son people

चौदह वर्षीय रेहान ने डायनिंग टेबिल परभोजन की थाली गुस्से में अपने आगे से सरकाते हुए कहा-” माँ ..आपने प्रॉमिस किया था कि आज आलू के परांठे बनाओगी और फिर से ये दाल-रोटी बना दी ..मैं नहीं खाऊंगा !!” ये कहकर वो उठा और घर से बाहर आकर खड़ा हो गया .उसकी माँ ने कई आवाज़ें लगाकर उसे रोकना चाहा पर वो नहीं रुका . बाहर खड़े हुए रेहान की नज़र सड़क किनारे मोची का काम करने वाले एक बच्चे और उसकी अंधी माँ पर पड़ी .रेहान ने देखा वो बच्चा सड़क पर लगे हैंडपम्प से हाथ धोकर एक गिलास पानी भरकर लाया और एक पोटली से रोटी-सब्ज़ी निकालकर पहला निवाला अपनी माँ के मुंह में रखने लगा .अंधी माँ ने हाथ से टटोल कर वो निवाला बच्चे के मुंह में रख दिया तब उस बच्चे ने दूसरा निवाला तोड़कर माँ के मुंह में रख दिया .उस बच्चे का अपनी माँ के प्रति प्यार देखकर रेहान लज्जित हो उठा अपने पर .वो तुरंत वापस घर में गया और डायनिंग टेबिल पर उदास बैठी माँ के चरणों में झुककर माफ़ी मांगते हुए बोला- ” माँ मुझ माफ़ कर दीजिये …चलिए भोजन करते हैं .” माँ के स्नेह से सिर पर हाथ रखते ही रेहान की आँखें भर आयी .

शिखा कौशिक ‘नूतन’



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1 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yamunapathak के द्वारा
January 24, 2014

बहुत अच्छी लघु कथा …मुझे याद है मेरी माँ ने कहा था जब कभी थाली में भोजन छोड़ने का ख्याल आये एक बार उन बच्चों को ज़रूर याद करना जो रेलवे प्लेटफार्म पर कचड़े के डब्बे से भी खाना उठा कर खा लेते हैं बहुत गहरी बात समझाई थी उन्होंने


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