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शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

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ऐसे नहीं चल पायेगी दुकान-ए-सियासत ![CONTEST ]

Posted On: 20 Jan, 2014 Contest,Celebrity Writer में

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शबनम से जलन होती शोलों की हिमायत ,
फूलों से चुभन होती काँटों की हिमायत !
……………………………………………..
अपनों पे भरोसा नहीं गैरों से शिकायत ,
ऐसे नहीं चल पायेगी दुकान-ए-सियासत !
……………………………………..
तोहमत उन्ही के सिर पर जो क़त्ल हो गए ,
दिन-रात हो रही है कातिल की हिफाज़त !
……………………………………….
वे हाथ जोड़ मांगते वोट-नोट सब ,
हैरान खुदा देखकर गुंडों की शराफत !
……………………………………………………………..
इंसानियत की बस्ती को आग लगाकर ,
‘नूतन’ करे दरिंदा मसीहा की खिलाफत !

शिखा कौशिक ‘नूतन’



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yamunapathak के द्वारा
January 21, 2014

अपनों पे भरोसा नहीं गैरों से शिकायत , ऐसे नहीं चल पायेगी दुकान-ए-सियासत ! ……………………………………..शिखाजी वर्त्तमान हालात पर सटीक शेर

January 20, 2014

तोहमत उन्ही के सिर पर जो क़त्ल हो गए , दिन-रात हो रही है कातिल की हिफाज़त ! वाह बहुत खूब और सही भी


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