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शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

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कविता-विषमयी जीवन राम कर रहा वहन [contest ]

Posted On: 19 Jan, 2014 Celebrity Writer में

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Shri Ram HD

विषमयी जीवन राम कर रहा वहन ,
पी रहा शिव की भांति कालकूट दुर्वचन !
……………………………………………
स्नेहमयी कैकेयी माता कैसे विषैली हो गयी ?
राम से बढ़कर प्रिय राज्य -लक्ष्मी हो गयी !!
प्रेम से कह देती माँ करता मैं वनगमन !
पी रहा शिव की भांति कालकूट दुर्वचन !
…………………………………………………
पुत्र-प्रेम से विवश पितु मेरे व्यथित भए ,
काल की गति कुटिल मुख से वे कुछ न कहें ,
पर राम तो निभाएगा प्राण देकर भी वचन !
पी रहा शिव की भांति कालकूट दुर्वचन !
……………………………………………….
हो गयी बेसुध मेरी जननी भी ये जानकर ,
कर रहा वन को गमन मैं वेष तापस धारकर कर ,
दृढ उर से कर रहे सिया लखन अनुसरण !
पी रहा शिव की भांति कालकूट दुर्वचन !
…………………………………………………………………..
रोक रहे नर व् नारी ‘राम मत जाओ ‘,
तुम ही राजा हो हमारे मान भी जाओ ,
बिन तुम्हारे तय हमारा अब तो है मरण !
पी रहा शिव की भांति कालकूट दुर्वचन !
……………………………………………………
जन जन से मेरी प्रार्थना धीरज धरो तुम सब ,
चौदह बरस कट जायेंगें विपदा मिटेंगीं सब ,
मेरा ही रूप हैं प्रिय भरत व् शत्रुघ्न !
पी रहा शिव की भांति कालकूट दुर्वचन !
……………………………………………
बहकी प्रजा चल पड़ी श्री राम के पीछे ,
मुरझायी हुई पौध हम राम ही सींचें ,
तमसा किनारे देंगें हम आमरण अनशन !
पी रहा शिव की भांति कालकूट दुर्वचन !
………………………………………………
मध्य-रात्रि में सब करने लगे शयन ,
सिया लखन सहित किया मैंने था गमन ,
प्रणाम कर उन जन को जिनके उर में नहीं छल !
पी रहा शिव की भांति कालकूट दुर्वचन !

शिखा कौशिक ‘नूतन’



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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

pkdubey के द्वारा
July 28, 2014

सुन्दर नूतन रामायण.सादर आभार ||

yogi sarswat के द्वारा
January 24, 2014

पुत्र-प्रेम से विवश पितु मेरे व्यथित भए , काल की गति कुटिल मुख से वे कुछ न कहें , पर राम तो निभाएगा प्राण देकर भी वचन ! पी रहा शिव की भांति कालकूट दुर्वचन ! ………………………………………………. हो गयी बेसुध मेरी जननी भी ये जानकर , कर रहा वन को गमन मैं वेष तापस धारकर कर , दृढ उर से कर रहे सिया लखन अनुसरण ! पी रहा शिव की भांति कालकूट दुर्वचन ! एकदम सुन्दर

vaidya surenderpal के द्वारा
January 24, 2014

बहुत ही सुन्दर, सारगर्भित कविता शिखा कौशिक  जी, बधाई ।

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
January 23, 2014

अच्छी प्रस्तुति ! शिखा जी बधाई !


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