! अब लिखो बिना डरे !

शीशे के हम नहीं कि टूट जायेंगे ; फौलाद भी पूछेगा इतना सख्त कौन है .

575 Posts

1449 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 12171 postid : 682930

''लंका में सन्नाटा है !!''[CONTEST ]

Posted On: 7 Jan, 2014 Contest में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

नाभि का अमृत सुखा राम ने लंकेश शीश को काटा है !
वानर दल में उत्साह अपार और लंका में सन्नाटा है !!
………………………………………………………..
भूमि पर गिरा दशानन जब स्तब्ध रह गए त्रिलोक ,
सहसा कैसे विश्वास करें मिट गया पाप का मूल स्रोत ,
ध्वजा कटी अन्याय की फहरी धर्म-पताका है !
वानर दल में उत्साह अपार और लंका में सन्नाटा है !!
………………………………………………………….
अब सिया-राम का हो मिलन उत्कंठित है लक्ष्मण का उर ,
श्री राम ने भेजा हनुमत को जो चले ह्रदय में हर्ष भर ,
श्री राम भक्त हनुमत को देख अति हर्षित सीता माता हैं !
वानर दल में उत्साह अपार और लंका में सन्नाटा है !!
………………………………………………………………………
बोले हनुमत हे मात ! सुनो श्री राम ने मारा रावण को ,
भगवन ने मुझको भेजा है आदर से आपको लाने को ,
ये दास आपके चरणों में श्रद्धा से शीश झुकाता है !
वानर दल में उत्साह अपार और लंका में सन्नाटा है !!
………………………………………………….
पहुंची सीता माता ज्यूँ ही हनुमत के संग श्री राम समक्ष ,
”शुद्धि परीक्षा ‘देने की श्री राम ने रख दी कठिन शर्त ,
नाग पितृ-सत्ता का यूँ स्त्री के डंक चुभाता है !
वानर दल में उत्साह अपार और लंका में सन्नाटा है !!
…………………………………………….
”अग्नि-परीक्षा” दे सिया श्री राम के चरणों में झुकी ,
पाकर सीता मृगनयनी को मुदित भये करुणा के निधि ,
जो खेल रचा है होनी ने अनायास ही होता जाता है !
वानर दल में उत्साह अपार और लंका में सन्नाटा है !!

शिखा कौशिक ‘नूतन’



Tags:

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

2 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yamunapathak के द्वारा
January 8, 2014

शिखाजी बहुत ही सुन्दर कविता है साभार

sadguruji के द्वारा
January 8, 2014

…………………………………. ”अग्नि-परीक्षा” दे सिया श्री राम के चरणों में झुकी , पाकर सीता मृगनयनी को मुदित भये करुणा के निधि , जो खेल रचा है होनी ने अनायास ही होता जाता है ! वानर दल में उत्साह अपार और लंका में सन्नाटा है !!अच्छी प्रेरक कविता के लिए बधाई.


topic of the week



latest from jagran