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कविता –(Poems)आँगन में तब आई धूप ![CONTEST ]

Posted On: 5 Jan, 2014 Contest में

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ठिठुर-ठिठुर काली भई तुलसी
हरा रूप जब भया कुरूप
आँगन में तब आई धूप !
………………………………
कातिल शीत हवाएं आकर
चूस गयी तन का पीयूष
आँगन में तब आई धूप !
……………………………….
गर्म शॉल लगें सूती चादर
कैसे काटें माघ व् पूस
आँगन में तब आई धूप !
……………………………..
सब जन कांपें हाड़ हाड़
हो निर्धन या कोई भूप
आँगन में तब आई धूप !
………………………………..
हिम सम लगे सारा जल ,
क्या जोहड़ नहर व् कूप ,
आँगन में तब आई धूप !
………………………………….
चहुँ ओर कोहरे की चादर ,
बना पहेली एक अबूझ ,
आँगन में तब आई धूप !
……………………………………………..
हुआ निठल्ला तन व् मन ,
गई अंगुलियां सारी सूज ,
आँगन में तब आई धूप !
……………………………
पाले ने हमला जब बोला ,
बगिया सारी गई सूख ,
आँगन में तब आई धूप !

शिखा कौशिक ‘नूतन’



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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

vaidya surenderpal के द्वारा
January 9, 2014

सुन्दर कविता।

yogi sarswat के द्वारा
January 9, 2014

.. हिम सम लगे सारा जल , क्या जोहड़ नहर व् कूप , आँगन में तब आई धूप ! …………………………………. चहुँ ओर कोहरे की चादर , बना पहेली एक अबूझ , आँगन में तब आई धूप ! …………………………………………….. हुआ निठल्ला तन व् मन , गई अंगुलियां सारी सूज , आँगन में तब आई धूप ! …………………………… पाले ने हमला जब बोला , बगिया सारी गई सूख , एहसासों को हवा देते सुन्दर शब्द आदरणीय नूतन जी !

yatindranathchaturvedi के द्वारा
January 9, 2014

अद्भुत, सादर।

ranjanagupta के द्वारा
January 8, 2014

सुन्दर शब्दों ,से सजी सुन्दर भावभरी कविता !!

Rajeev Varshney के द्वारा
January 8, 2014

बहन शिखा जी उत्तर भारत की शीत लहर का सटीक वर्णन करती सुन्दर रचना. बधाई सादर राजीव वार्ष्णेय

yamunapathak के द्वारा
January 8, 2014

शिखा जी आपकी प्रत्येक रचना सुन्दर है.

January 6, 2014

बहुत सुन्दर व् सार्थक अभिव्यक्ति .नव वर्ष २०१४ की हार्दिक शुभकामनाएं

Bhagwan Babu 'Shajar' के द्वारा
January 5, 2014

सुन्दर रचना


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