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शहीदों के कफ़न तक बेच खाते हैं कई बुज़दिल![CONTEST ]

Posted On: 3 Jan, 2014 Others में

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शहादत की यहाँ कीमत लगाते हैं कई बुज़दिल ,
ताला नोट का मुंह पर लगाते हैं कई बुज़दिल !
…………………………………………..
सियासत के लिए इमदाद देते हैं करोड़ों की ,
यहाँ आंसू मगरमच्छी बहाते हैं कई  बुज़दिल!
…………………………………………………….
ये एक दिन में भुला देते शहीदों की शहादत को ,
दिखावे को बड़े मेले लगाते हैं कई बुज़दिल  !
………………………………………
शहादत को बना मुद्दा सियासत की सिके रोटी ,
शहीदों के कफ़न तक बेच खाते हैं कई बुज़दिल !
…………………………………………………….
बुझा दीपक है जिस घर का वतन के वास्ते ‘नूतन’
नहीं सिर उसकी चौखट पर झुकाते हैं कई  बुज़दिल !

शिखा कौशिक ‘नूतन’



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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sanjay kumar garg के द्वारा
January 7, 2014

“शहीदों के कफ़न तक बेच खाते हैं कई बुज़दिल !” सुन्दर अभिव्यक्ति!

Ajay Yadav के द्वारा
January 4, 2014

वाह कितना कडवा सच है

jlsingh के द्वारा
January 4, 2014

बुझा दीपक है जिस घर का वतन के वास्ते ‘नूतन’ नहीं सिर उसकी चौखट पर झुकाते हैं कई बुझदिल ! आज के सन्दर्भ में उपयुक्त!

January 3, 2014

BAHUT SAHI KAHA .


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